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न थमी पहिये की रफ्तार

न थमी पहिये की रफ्तार

साल की शुरुआत में मंदी की आंधी में बुरी तरह से प्रभावित हुई ऑटो इंडस्ट्री से खुशियां मानो गायब सी हो गई थीं। गाड़ियों की बिक्री में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज होती जा रही थी। इससे बचने के लिए कंपनियों ने कॉस्ट कटिंग पर जोर देना शुरू किया, जिससे बहुत सी नौकरियां भी गईं। पर सही समय पर इस इंडस्ट्री ने वापसी की और फिर यह रफ्तार पूरे साल कम नहीं हुई। पैसेंजर कार और मोटरसाइकिलों की बिक्री बढ़ते-बढ़ते नवंबर में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। पर कॉमर्शियल व्हीकल का बुरा दौर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले दो-चार महीनों में इस क्षेत्र की स्थिति भी सुधरेगी। 

खूब लॉन्च हुईं नई कारें
2008 के खराब दौर से गुजर कर सभी ऑटो कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिसकी बदौलत लगभग 50 गाड़ियां 2009 में लॉन्च हुईं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने टोयोटा की इनोवा को टक्कर देने के लिए जाइलो पेश की। फिएट ने लीनिया को बाजार में उतारा। इसके पेट्रोल और डीजल दोनों वजर्न से होंडा सिटी, मारुति-सुजुकी एसएक्सफोर, फोर्ड फिएस्टा और हुंडई वर्ना को कड़ी टक्कर देने की कोशिश भी की गई, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ कि लीनिया लोगों में छा गई हो। इस कार के मल्टीजेट इंजन को सिर्फ एक औसत बाजार मिला। हालांकि कंपनी के ग्रांड पुंटो को बाजार से अच्छा रिस्पांस जरूर मिला। वहीं दूसरी ओर हुंडई की आई-20 अपने नए लुक से लोगों को दीवाना बनाने में सफल रही। इस गाड़ी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों ने इस गाड़ी के आने के बस कुछ ही माह बाद आई 30 का इंतजार भी शुरू कर दिया।

बड़ी कार में टाटा ने इंडिगो मांजा को उतारकर एक बार फिर हलचल सी मचा दी। मांजा का लगभग साढ़े सात लाख का टॉप मॉडल 12 लाख की गाड़ियों को टक्कर देने में सफल हुआ। मारुति और हुंडई ने अपने दो मॉडल में लिमिटेड वजर्न निकाला। मारुति ने ऑल्टो एक्साइट पर कुछ नए फीचर का तड़का लगाया तो हुंडई ने सैंट्रो जिंग में कुछ कलर भरे। इसके साथ ही मारुति एसएक्सफोर के नए इंजन के जरिए कंपनी ने पहली बार ऑटोमेटिक गाड़ी बाजार में उतारी। मारुति एस्टिलो में कुछ प्रयोग करके उसका लुक बदल कर लोगों के सामने पेश किया। इसके अलावा हुंडई के 1.4 पेट्रोल ऑटोमेटिक डीजल वजर्न लोगों की पसंद बने। होंडा सिविक और टोयोटा फॉचरूनर के रूप में थोड़ी महंगी गाड़ियां बाजार में उतरीं, जिन्हें यहां के ग्राहकों से तवज्जो मिली। वहीं शेवरले क्रूज के माध्यम से जनरल मोटर ने एक अच्छी गाड़ी बाजार में उतारी। 

लग्जरी गाड़ियों को मिला सम्मान
जहां एक ओर बाजार में छोटी गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री हुई तो वहीं दूसरी ओर बड़ी गाड़ियों को चाहने वालों की संख्या में भी खूब इजाफा हुआ। सोसायटी ऑफ  इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्स (सियाम) के अनुसार, छोटी कारों की बिक्री में आई रिकॉर्ड तेजी के बीच महंगी कारों की बिक्री भी बढ़ी। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के बीच कुल 850 लग्जरी कारें तथा प्रीमियम श्रेणी की 6668 कारों की बिक्री हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह संख्या 6029 थी। बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कारों की बिक्री भी बढ़ी। मर्सिडीज के चाहने वालों की संख्या घटी है, जिसकी वजह से इसके बिक्री भी कम हुई है। कार एक्सपर्ट इसका प्रमुख कारण बीएमडब्ल्यू और फोक्सवैगन की ऑडी की लोकप्रियता बता रहे हैं। इस आंकड़े में लैंड रोवर जगुआर और रोल्स रॉयस की कारें भी शामिल हैं। टाटा समूह ने चालू वित्त वर्ष में भी लैंड रोवर और जगुआर को भारतीय बाजार में पेश किया है। रोल्स रॉयस भी भारतीय बाजार में महंगी और लक्जरी कारों की बढ़ रही मांग के मद्देनजर लॉन्च की गई। लक्जरी श्रेणी में बीएमडब्ल्यू की सेवन सीरीज मॉडल मर्सिडीज बेंज की एस क्लास मॉडल और फोक्सवैगन की क्यू 7 एवं ए 8 मॉडल शामिल हैं। इन गाड़ियों ने इसी साल भारत का दीदार किया। 

प्रीमियम श्रेणी में आने वाली बीएमडब्ल्यू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सीरीज पांच एवं छह, होंडा सिएल कार्स इंडिया लिमिएड की एकोर्ड, हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड की सोनाटा, मर्सिडीज बेंज की ई क्लास, निसान मोटर की टीना, स्कोडा आटो की सुपर्ब, टोयोटो किलरेस्कर की कैमारी, फोक्सवैगन की ए4 और ए6 तथा पस्सात शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रीमियम श्रेणी में होंडा एकोर्ड को छोड़ कर शेष कंपनियों की कारों की बिक्री बढ़ी है, जबकि होंडा एकोर्ड की बिक्री कम हुई है। हुंडई की सोनाटा की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष नवंबर में मात्र दो सोनाटा बिकी थीं, जबकि इस वर्ष यह संख्या 15 हो गई। अप्रैल से नवंबर 2009 में कुल 297 सोनाटा बिकीं, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 231 थीं। इस वर्ष नवंबर में मर्सिडीज की ई क्लास एवं एस क्लास की कारों की बिक्री
में पिछले वर्ष की तुलना में ढाई गुना से अधिक  वृद्धि हुई है।

स्कोडा ऑटो की सुपर्ब की बिक्री में अच्छी वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष नवंबर में जहां मात्र 16 कारें बिकी थीं, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 218 हो गईं। इस वर्ष नवंबर में फोक्सवैगन की ऑडी ए4 ए6 ए8 क्यू7 एवं पस्सात मॉडल की कुल मिलाकर 200 कारें बिकीं, जबकि पिछले वर्ष पस्सात को छोड़ कर कुल 68 कारें ही बिकी थीं।

कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री पर ग्रहण
आठ दिसंबर को जारी हुए नवंबर माह के आंकड़ों में भी कॉमर्शियल वाहनों का उत्पादन नहीं बढ़ सका। 2008 के इसी माह की तुलना में पैसेंजर कैरियर के प्रोडक्शन में 7.34 प्रतिशत कमी नजर आई। वहीं दूसरी ओर गुड्स कैरियर के वाहनों में भी 9.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

कुछ प्रमुख कारें 
फिएट 500, टाटा इंडिगो मांजा, टोयोटा फाच्यरूनर, फिएट ग्रैंड पुंटो, होंडा जैज, मारुति सुजुकी रिट्ज, प्रीमियर रियो, ऑल्टो एक्साइट, नैनो, रोल्स रॉयस की घोस्ट आदि। कीमत : 1 लाख से 1 करोड़ से भी अधिक

कुछ प्रमुख मोटरसाइकिलें
करिज्मा जेएमआर, बजाज पल्सर 135 सीसी, टीवीएस अपाची 180 आरटीआर मेनेंस, होंडा मीमेंस, होंडा सीबीआर 1000 आरआर, होंडा सीबी 1000आर, सुजुकी हायाबूसा, सुजुकी एसेस, बजाज क्रिस्टल डीटीएसआई, टीवीएस वीगो, टीवीएस जाइव, सीवी ट्विस्टर(होंडा), डिस्कवर डीटीएस एसआई (बजाज) आदि।
कीमत : 40 हजार से 20 लाख रुपये तक

कुछ प्रमुख ई-स्कूटर
ओमा स्टार, रोमर, स्ट्रीट राइडर, दिवा, स्माइल, रोमर+, हीरो इलेक्ट्रिक, यो बाइक, अल्ट्रा आदि।
कीमत : 14 से 35 हजार रुपये तक

नैनो की लॉन्चिंग
10 जनवरी 2008 को दिल्ली का प्रगति मैदान एक ऐसी घटना का गवाह बना, जिसे देख कर पूरी दुनिया आश्चर्य में पड़ गई। दुनिया भर की मीडिया की नजरें भारत के रतन टाटा पर टिक गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टाटा ने दुनिया की सबसे सस्ती कार नैनो का प्रदर्शन उस ऑटो एक्सपो में किया था। 623 सीसी इंजन क्षमता वाली यह कार भारतीय सड़कों पर  जुलाई 2009 में उतरी। इस कार के पहले मालिक मुंबई के रहने वाले अशोक विचारे बने। इनको स्वयं रतन टाटा ने नैनो की चाभी सौंपी। इस तरह 18 जुलाई को नैनो भारतीय रोड पर थिरकती हुई आ गई। इस गाड़ी के टेस्ट ड्राइव को पूरी दुनिया के मीडिया ने लिया और इसकी क्षमता की अद्भुत सराहना की।

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