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पर्यावरण व विकास पर कलाम का पाठ

पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचाने वाले विकास का मॉडल पहले के मुकाबले आज ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। यह बात भारत जैसे विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देशों के लिए भी लागू होता है। इसी सिलसिले में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने गुजरात के मंत्रियों और नौकरशाहों को प्रशासन और जलवायु परिवर्तन की बारीकियां बताईं।

पाकिस्तान की सीमा से सटे रन्न ऑफ कच्छ में दो दिवसीय चिंतन शिविर में कलाम ने पर्यावरण अनुकूल विकास पर अपने विचार व्यक्त किए। पहली बार यह कार्यक्रम रेगिस्तानी इलाके और खासकर पाकिस्तान सीमा के समीप आयोजित किया गया था।

मोदी ने जलवायु परिवर्तन विषय वाले इस विशेष सत्र की मालदीव में मंत्रिमंडल की समुद्र के पानी में और नेपाल में मंत्रिमंडल की माऊंट एवरेस्ट पर हुई बैठकों से तुलना की। मोदी सरकार के दौरान ही गुजरात में इस वर्ष के प्रारंभ में जलवायु परिवर्तन नामक अलग विभाग की स्थापना हुई और इसकी चहुंओर सराहना हुई।

इस तरह के कार्यक्रमों से भारत के अन्य राज्यों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। क्या आपके पास सामाजिक/राजनीतिक मुद्दों से जुड़े कोई विचार हैं? आप उसे हमारे साथ शेयर करें जिसे हम दुनिया के सामने रखेंगे और साथ ही आपको देंगे एक आकर्षक इनाम। तो देर किस बात की...?

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  • Web Title:पर्यावरण व विकास पर कलाम का पाठ