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पानी पर रहा समुद्री डाकुओं का आतंक

पानी से उभरा दस्युओं का खतरा वर्ष 2009 में कम नहीं हुआ बल्कि पिछले साल की तुलना में जलदस्युओं ने इस साल अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। भारत भी इस खतरे से बच नहीं पाया। लेकिन उसने इस खतरे का जमकर मुकाबला भी किया।

2009 के पहले नौ महीनों में दुनियाभर में जहाजों पर 306 हमले हुए, जिनमें से आधे से ज्यादा हमले सोमालिया के दुर्दान्त समुद्री लुटेरों ने किए।

वर्ष भर जलदस्युओं ने कई हमलों को अंजाम दिया। भारतीय नौसेना के एक युद्धक जहाज ने सात दिसंबर को अदन की खाड़ी में सोमालिया से लगने वाले तटीय क्षेत्र में अमेरिकी स्वामित्व वाले टैंकर पर जलदस्युओं के हमले को विफल कर दिया।

नार्दिक शिपिंग कंपनी एमटी नार्दिक स्पिरिट के स्वामित्व वाले टैंकर पर जलदस्युओं ने हमला किया। टैंकर के चालक दल ने तत्काल इस क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के जहाज को सूचना भेजी। नौसेना ने मैरीन कमांडो के साथ अपना हेलीकॉप्टर भेजा। हेलीकॉप्टर पहुंचने के बाद जलदस्युओं ने टैंकर को अपहृत करने का प्रयास छोड़ दिया। इसके बाद युद्धपोत ने टैंकर को साथ में लेकर इसे सुरक्षित बाहर तक पहुंचाया।

सेशेल्स एवं मॉरीशस के तटों पर गश्ती एवं निगरानी के लिए भारत ने 23 नवंबर को एक अतिरिक्त नौसेना पोत आईएसआई सावित्री को तैनात किया। यह पोत चेतक हेलीकॉप्टर और मैरीन कमांडो से लैस है।

सोमालिया के जलदस्युओं ने 22 अक्टूबर को सेशल्स के समीप पनामा का एक जहाज अगवा कर चालक दल के करीब 24 भारतीय सदस्यों को बंधक बना लिया। 22,000 टन वजनी मालवाहक जहाज एमवी अल खलीक को सोमालिया में अगवा किया गया।

22 अक्टूबर को ही उत्तरी सेशल्स में इटली के जहाज जोली रोस्सो को भी समुद्री दस्युओं ने निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।

11 नवंबर को सोमालिया में जलदस्युओं ने अफ्रीका के पूर्वी तट पर पनामा के पोत का अपहरण कर लिया। इसके चालक दल के 18 सदस्यों में 15 भारतीय थे।

इंटरनेशनल मैरीटाइम ब्यूरो (आईएमबी) का कहना है कि वर्ष 2008 के मुकाबले इस वर्ष के पहले नौ माह में जहाजों पर हमले की वारदातें बढ़ी हैं। बीते साल कुल 293 हमले हुए थे, जबकि इस वर्ष सितंबर तक 306 हमले हो चुके थे।

समुद्री लुटेरों ने लाल सागर के दक्षिणी क्षेत्र, ओमान के पूर्वी तट और बाब अल मंदाब जलडरूमध्य तक अपनी गतिविधियों का विस्तार कर लिया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सुरक्षा परिषद को पिछले दिनों सौंपी एक रिपोर्ट में कहा है कि सोमालिया तट पर जहाजों के अपहरण की समस्या से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा की गई सघन कार्रवाई के बाद समुद्री डाकू हिंद महासागर का रूख कर रहे हैं।
   
बान के अनुसार नौसेना जहाजों और सैन्य विमानों की तैनाती तथा इस मार्ग से गुजरने वाले पोतों द्वारा स्वयं बरते जा रहे सुरक्षा उपायों से समुद्री डकैती की घटनाओं में काफी कमी आई है।

आईबीएम की मानें तो 2008 की तुलना में इस वर्ष विश्व भर में समुद्री डकैतों के हमले बढ़ चुके हैं और हमलावर आग्नेयास्त्रों का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं। आईएमबी ने एक रिपोर्ट में कहा था हमलों में वृद्धि का सीधा संबंध सोमाली समुद्र तट तथा अदन की खाड़ी में डाकुओं की गतिविधियों में वृद्धि से है। चीन अपने पोतों को इलाके से दूर रहने की चेतावनी दे चुका है।

मछली पकड़ने वाले फ्रांसीसी पोत पर जलदस्युओं के हमले के बाद यूरोपीय संघ के युद्धपोतों ने अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में सोमालिया तट के करीब सात संदिग्ध जलदस्युओं को गिरफ्तार किया था।

अदन की खाड़ी में मौजूद नाटो के बल आशंका जता चुके हैं कि मौसम में सुधार के साथ ही जलदस्युओं की गतिविधियां बढ़ जाएंगी। जलदस्युओं से निपटने के लिए नाटो बलों ने ऑपरेशन ओशियन शील्ड शुरू किया है। भारत, रूस, चीन और जापान ने भी अपने देश के जहाजों के यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अदन की खाड़ी में अपने पोत तैनात किए हैं।

अदन की खाड़ी में सोमालिया का पूर्वी तट जहाजों के नौवहन के मामले में दुनिया का सबसे व्यस्त मार्ग है, जहां इस वर्ष अब तक 176 से अधिक जहाजों पर हमला हुआ है। जो जहाज जलदस्युओं ने रिहा किए, उनकी एवज में उन्होंने भारी फिरौती भी ली। उन्होंने 18 नवंबर को फिरौती लेने के बाद एक स्पेनिश ट्रॉलर तथा उसके चालक दल के 36 सदस्यों को रिहा किया।

नवंबर के दूसरे सप्ताह में आईबीएम ने बताया था कि सोमाली जलदस्युओं के कब्जे में अब भी दर्जन भर से ज्यादा पोत हैं, जिनमें चालक दल के 200 से अधिक सदस्य सवार हैं।

अमेरिका ने जलदस्युओं से निपटने के उपाय तेज करने का आह्वान किया और अपहृत पोतों तथा चालक दल के सदस्यों की रिहाई के लिए फिरौती न देने की चेतावनी देते हुए कहा कि फिरौती दिए जाने की वजह से हाल ही में जहाजों के अपहरण की घटनाएं बढ़ी हैं।

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