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वित्तीय लेनदेन से जुड़े आपराधिक मामले हुए दोगुने

वित्तीय लेनदेन से जुड़े आपराधिक मामले हुए दोगुने

यह साल आतंक एवं अपराध जगत में वित्तीय लेनदेन के बढ़ते मामलों के लिए भी जाना जाएगा, क्योंकि इस साल ऐसे वित्तीय लेनदेन के मामले बढ़कर दोगुना हो गए। सरकार द्वारा मनी़ लांडरिंग रोधी प्रणाली को मजबूती से लागू करने और काल़े़धन का पता लगाने में तत्परता के चलते 4,000 से अधिक संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता लगाने में मदद मिली जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है।

इसके अलावा 35,000 से अधिक मामले नकली नोटों के सामने आए जिनका लेनदेन बैंकिंग चैनलों के जरिए किया जा रहा था।

वित्त मंत्रालय को बैंकों ने 2,826, वित्तीय संस्थानों ने 841 और मध्यस्थों ने 742 संदिग्ध लेनदेन की जानकारी उपलब्ध कराई और इस तरह से कुल 4,409 संदिग्ध मामले प्रकाश में आए जो पिछले साल के 1,916 मामलों के मुकाबले दोगुने से अधिक है।

नकली नोटों के मामलों में भी जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई और विभिन्न वर्ग के बैंकों ने इस संबंध में 35,730 मामले दर्ज कराए। वर्ष 2007-08 के दौरान ऐसे मामलों की संख्या महज 8,580 थी।

रपट के मुताबिक, मार्च, 2009 तक दर्ज कराए गए नकली नोटों के मामलों में सात करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली नोटों का प्रसार हुआ।

इस दौरान नकली नोटों के सबसे अधिक 29,846 मामले निजी बैंकों द्वारा, जबकि 396 मामले सार्वजनिक बैंकों एवं 5,422 मामले विदेशी बैंकों द्वारा दर्ज कराए गए। मनी लांडरिंग, आतंकी वित्त पोषण और अन्य आर्थिक अपराधों के ढांचे का पता लगाने के लिए सरकार ने 55,11,150 नकदी लेन-देनों की जांच की।

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