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प्रधान न्यायाधीश बिना फन के सांप जैसे: हाई कोर्ट जज

प्रधान न्यायाधीश बिना फन के सांप जैसे: हाई कोर्ट जज

न्यायमूर्ति दिनाकरन पर उपजे विवाद के बाद भारत के प्रधान न्यायाधीश के नैतिक प्राधिकार की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि शीर्षस्थ न्यायाधीश बिना फन के सांप जैसे हैं, जो सिर्फ फुफकार सकते हैं, लेकिन काट नहीं सकते।

देश की प्रधान न्यायपालिका पर वार करते हुए न्यायमूर्ति डी वी शैलेंद्र कुमार ने दागी न्यायाधीशों के खिलाफ कदम उठाने के उसके नैतिक प्राधिकार की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है यह धारणा गलत है कि न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर भारत के प्रधान न्यायाधीश इस नैतिक अधिकार का अनियमित आचरण करने वाले न्यायाधीश को दुरुस्त करने में प्रयोग कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति कुमार ने कर्नाटक स्टेट एडवोकेटस कॉन्फ्रेंस की स्मारिका में न्यायिक जवाबदेही पर लिखे अपने लेख में यह टिप्पणियां दी हैं। न्यायमूर्ति कुमार ने लिखा है, भारत के प्रधान न्यायाधीश की महज नैतिक जिम्मेदारी का कोई महत्व नहीं है, जब तक कि वह बाध्यकारी न हो, जिसका संविधान में कोई प्रावधान नहीं है।

उन्होंने लिखा है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश की स्थिति बिना फन के सांप जैसी है, जो केवल फुफकार सकता है, काट नहीं सकता। यह जल्द ही सबके सामने जाहिर हो जाएगा और तब इस सांप से कोई नहीं डरेगा। चाहे वह कितना ही डरावना क्यों न दिखे और वह कितनी ही जोर से क्यों न फुफकारे। दुर्भाग्य से यही सच है।

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