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गन्ना लेना है तो दाम बढ़ाओ

गन्ने की कमी का नुकसान चीनी मिलों के सामने आने लगा है। गन्ना पाने के लिए ना चाहते हुए भी निजी चीनी मिलों को प्राइसवार छेड़ना पड़ रहा है। एक चीनी मिल रेट बढ़ाती है तो मजबूरी में दूसरी मिलों को मजबूरी में गन्ना मूल्य बढ़ाना पड़ रहा है। अब तो किसान भी साफ कहने लगे हैं कि अगर गन्ना लेना है तो दाम बढ़ाना ही पड़ेगा।

गन्ने से किसानों का मोह भंग होना चीनी मिलों की मुसीबत बन गया है। इस साल मेरठ मंडल में 52 हजार हेक्टेयर कम गन्ना बोया गया। रही-सही कसर गन्ना मूल्य को लेकर चले किसानों के आंदोलन ने पूरी कर दी। चीनी मिलों का पेराई सत्र बहुत पीछे खिसक गया और काफी गन्ना क्रेशर पर बिक गया।

देर से पेराई सत्र शुरू करने के बाद चीनी मिलों को गन्ने की कमी सताने लगी है। जिसका असर प्राइसवार के रूप में सामने आ रहा है। राज्य सरकार का घोषित 165-170 रुपए कुंतल का दाम पीछे रह गए हैं। किसान आंदोलन के बाद चीनी मिलों ने 190-195 रुपए कुंतल का दाम घोषित कर दिया।

इसके बाद गन्ना नहीं मिलने पर चीनी मिलों को दाम 205-210 रुपए कुंतल करना पड़ा। इसके बाद मुरादाबाद की वीनस शुगर मिल ने दो बार गन्ने का दाम बढ़ाया। इसकी देखादेखी मेरठ मंडल की सभी मिलों को गन्ने का दाम 215-220 रुपए कुंतल करना पड़ा। अब सहारनपुर की शेरमऊ चीनी मिल ने गन्ना मूल्य 220-225 रुपए कुंतल कर दिया। इसके बाद सभी चीनी मिलों को यह दाम देना पड़ा।

अब किसानों ने साफ कह दिया है कि दाम नहीं बढ़ाने पर गन्ना नहीं दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष राजवीर सिंह का कहना है कि प्राइसवार के चलते गन्ने का दाम 300 रुपए कुंतल को भी पार करेगा। गन्ने की कमी का किसान पूरा फायदे उठाएंगे और चीनी मिलों को भी भविष्य में मनमानी नहीं करने का सबक मिलेगा।

 

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