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राजस्थान में गहलोत सरकार का एक साल

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने अपने पिछले शासन और मौजूदा एक साल के शासन में बिजली सुधार और कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश को बिजली में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए और आगामी वर्ष में उसकी जल संरक्षण पर ध्यान देकर प्रदेश को जल समस्या से मुक्ति दिलाने की योजना है।

गहलोत ने अपने दूसरे शासन का एक वर्ष पूरा होने और अलविदा-2009 पर बातचीत करते हुए बिजली सुधार क्षेत्र में किए निर्णयों को एक साल का सबसे बड़ा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान बिजली क्षेत्र में सुधार करते हुए पिछली भाजपा सरकार की कमियों को दूर करने का काम किया गया। ऊर्जा का आर्थिक अर्थव्यवस्था क्षेत्र में बड़ा योगदान है, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मेरी पूर्व सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में जो कार्य किए थे, पिछली सरकार को उसका फायदा मिला।

गहलोत ने कहा कि बीते एक साल के दौरान तीन हजार नौ सौ साठ मेगावाट बिजली उत्पादन की परियोजनाओं पर चौबीस हजार करोड़ रूपए खर्च किए और मंत्रिमंडल ने आगामी पंचवर्षीय योजना के दौरान 4200 मेगावाट की छह बिजली परियोजनाएं लगाने का सिद्धांतत: निर्णय किया।

गहलोत ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार अपने पूरे शासनकाल में मात्र जुबानी जमा खर्च करती रही। अगरउनका वित्तीय प्रबंधन ठीक होता तो राज्य पर 83 हजार करोड़ रूपए का कर्जा न चढ़ा होता। उन्होंने कहा कि केंद्र की संप्रग सरकार ने पिछली सरकार की भरपूर आर्थिक मदद की जिसे वह खर्च नहीं कर सकी। हमारी सरकार की नीयत व नीति एक है, लेकिन पूर्व भाजपा सरकार की नीयत और नीति में फर्क था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीपीएल परिवार व गरीबों के लिए उनकी सरकार संवेदनशीलता की भावना से काम कर रही है, जबकि पिछली भाजपा सरकार हठधर्मी और संवेदनहीन थी। गहलोत सरकार ने जातियों को मिलाने का काम किया जबकि पूर्व भाजपा सरकार ने जातियों को आपस में लड़ाने का काम किया। गहलोत सरकार ने किसी फैसले में नफा-नुकसान नहीं देखा, जबकि उस सरकार ने हर निर्णय में नफा नुकसान देखते हुए जातियों को लड़ाया।
   
उन्होंने कहा कि बिजली सुधार का उनका फैसला सही था, हालांकि उस समय उसकी आलोचना की गई। बीते वर्ष कृषि को मजबूती देने के लिए पांच साल के लिए काश्तकारों की बिजली दरंे नहीं बढाने और जलसंकट को देखते हुए बूंद बूंद से सिंचाई प्रणाली को अपनाने वाले किसानों को प्राथमिकता से बिजली कनेक्शन देने का फैसला किया गया।
   
गहलोत ने अपनी दूसरी पारी का एक साल पूरा होने से एक दिन पहले बातचीत करते हुए कहा राजस्थान प्रदेश में एक नहीं काफी समस्याएं हैं । पीने के पानी की समस्या हमारे सामने एक चुनौती है। भारत सरकार इसका समाधान करने में राज्य सरकार की भरपूर मदद कर रही है।


गहलोत ने कहा कि प्रदेश में जल संकट को दूर करने के लिए विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है लेकिन जब तक लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक नहीं किया जाएगा, इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में सामान्य से अधिक पानी का दोहन हो रहा है, जो चिन्ता का विषय है। सभी राजनीतिक पार्टियों को इस मुद्दे पर राजनीतिक दृष्टिकोण को छोड़कर समाधान ढूंढना चाहिए और उनकी सरकार इस दिशा में पहल करने के लिए तैयार है।

     उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पानी का दुरूपयोग रोकने एवं जल संरक्षण के लिए शीघ्र ही प्रयास करेगी । उन्होंने दस साल पहले पानी, बिजली बचाओ सबको पढ़ाओ का नारा दिया था तो पिछली सरकार ने इसकी हंसी उड़ाई थी, लेकिन अब कई सरकारे इस नारे को अपना रही हैं। अगले साल की प्राथमिकतां में निरक्षता दूर करना और सहकारिता को बढ़ावा देना भी शामिल है।
    
गहलोत ने कहा कि वैश्वीकरण और उदारीकरण को देखते हुए उच्च शिक्षा सुधार पर विशेष ध्यान देना होगा। इस दिशा में यदि पूरी तैयारी नहीं हुई तो हम पिछड़ जायेंगे।
    
गहलोत ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण के लिए महिला सहायता समूह को मजबूती से बढाना होगा । उन्होंने कहा, मेरा मंत्रिमंडल और सरकारी मशीनरी अच्छा काम कर रही है। जनता से किये वायदों को हम पूरा करेंगे। इनमें से कई वायदे पूरे कर भी चुके हैं।

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  • Web Title:राजस्थान में गहलोत सरकार का एक साल