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बाढ़ और राजनीतिक बगावत से कर्नाटक में भूचाल

2009 कर्नाटक के लोगों को इतिहास की सबसे भयानक बाढ़ से जूझना पड़ा, जिसमें लाखों लोग बेघर हो गए। इसके साथ ही इस वर्ष को राजनीतिक बगावत के लिए भी याद रखा जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री के खिलाफ उठी बगावत ने राज्य में भाजपा की पहली सरकार को संकट में डाल दिया और न्यायपालिका की गरिमा भी धूमिल हुई।

दिनाकरण संकट
जमीन हथियाने के आरोपों का सामना करने के बावजूद कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरण द्वारा पीठ का नेतृत्व करने के विरोध में उठा आंदोलन न्यायपालिका के सम्मान के लिए धब्बा साबित हुआ। इस दौरान दो न्यायाधीशों को अदालत कक्ष में बंद कर दिया गया और दिनाकरण की फजीहत हुई।

राज्यसभा के कम से कम 75 सांसदों ने दिनाकरण के खिलाफ महाभियोग का नोटिस दिया, जिसमें सार्वजनिक जमीन हथियाने और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने सहित कुल 12 आरोप लगाए गए थे।

बाढ़ का कहर
राज्य में अब तक की भीषणतम बाढ़ में 220 लोगों ने जान गंवाई, लाखों लोग बेघर हो गए, साढ़े 18 हजार करोड़ रूपए से अधिक की हानि हुई और बीस लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि बर्बाद हो गई।

बाढ़ पीड़ितों के बचाव, राहत और पुनर्वास के लिए बाढ़ प्रभावित जिलों में 1700 से ज्यादा राहत शिविर लगाए गए, लेकिन वहां से अक्सर ऐसी शिकायतें आती रहीं कि राहत सामग्री सही ढंग से और सही समय पर सही लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है।

सरकार अब भी बाढ़ की इस आपदा से निपटने की कोशिशों में लगी है। राहत अभियानों के दौरान मंत्रियों के बीच परस्पर तनातनी से राजनीतिक बगावत की स्थिति पैदा हो गई, जिससे बाढ़ राहत अभियानों को झटका लगा। हालात इतने बिगड़ गए कि राज्यपाल एचआर भारद्वाज को बाढ़ पीड़ितों की तरफ से बोलना पड़ा और उन्होंने अंदरूनी कलह के कारण राहत कार्य रोकने के लिए सरकार को खरी-खरी सुनाई।

येदियुरप्पा पर आंच, रेड्डी की फांस
मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के कामकाज के तरीके से नाराज मंत्रियों ने बगावत का बिगुल बजाकर सरकार को गहरे संकट में डाल दिया। वरिष्ठ भाजपा नेता अरूण जेटली को राज्य में भाजपा की पहली सरकार का अस्तित्व बचाने के लिए कर्नाटक आना पड़ा।

बागी नेता पार्टी के मशविरे को तो मानने को तैयार थे, लेकिन येदियुरप्पा से बात करने को कतई राजी नहीं हुए। लिहाजा येदियुरप्पा को एक समझौता फॉर्मूला दिया गया, जिसके बाद ग्रामीण विकास मंत्री शोभा करंदलजे को मंत्रिमंडल से निकाल दिया गया और विधानसभा अध्यक्ष जगदीश शेटर को कैबिनेट में शामिल किया गया।

कर्नाटक के पर्यटन मंत्री जनार्दन रेड्डी के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापों की घटना भी इस बरस सुर्खियों में रही। ऐसा आरोप था कि रेड्डी की खनन कंपनी ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी गैरकानूनी तरीके से खनन करती है।

स्वाइन फ्लू और क्राइम की दहशत
सिलिकान सिटी में गर्मियों में स्वाइन फ्लू का खासा प्रकोप रहा। इस महामारी के 1600 मामले सामने आए और राज्य में 120 से अधिक लोगों की जान गई। अपराध के मोर्चे पर पांच महिलाओं को जहर देकर मारने वाली सायनाइड मलिका को मौत की सजा दी गई, जबकि इसी तरीके से 21 महिलाओं की हत्या करने वाला मनोरोगी मोहन कुमार भी पकड़ा गया।

44 वर्षीय मलिका मंदिरों के आसपास घूमती थी और महिला श्रद्धालुओं में से अपने शिकार ढूंढती थी, जबकि मोहन कुमार उर्फ आनंद अधेड़ उम्र की महिलाओं को विश्वास जीतता था और उन्हें शादी करने के बहाने अपने कमरे में ले जाकर बलात्कार के बाद उनकी हत्या कर देता था।

कला के क्षेत्र में इस वर्ष गंगूबाई हंगल की मौत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति रही। हुबली की गंगूबाई किराना घराना से ताल्लुक रखती थीं ।

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