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हमले, हत्या और बहिष्कारों का बोलबाला रहा

मणिपुर में वर्षभर हत्या, अपहरण, आतंकी हमलों और बहिष्कारों का बोलबाला रहा। इन सबसे बेखबर राज्य के मुक्केबाजों ने अपनी लगन और मेहनत के दम पर शानदार प्रदर्शन कर सफलता का मार्ग प्रशस्त किया और गड़बड़ी वाले इस राज्य के लिए खुशी के कुछ पल बटोरे।

सशस्त्र बल [विशेष अधिकार] कानून को वापस लिए जाने की मांग के समर्थन में आमरण अनशन कर रहीं इरोम शर्मीला का मामला खबरों में रहा क्योंकि उनका विरोध आंदोलन दसवें वर्ष में प्रवेश कर गया। राज्य के प्रतिभाशाली मुक्केबाज मायेंगबाम सुरंजय सिंह ने यूरोपीय ग्रां प्री और एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य की शान बढ़ाई, जबकि चार बार की विश्व चैंपियन मैरी कोम को भारतीय खिलाडि़यों के सबसे बड़े सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया।

इस वर्ष विभिन्न कारणों से राज्य के शैक्षणिक संस्थानों को तीन माह के लिए जबर्दस्ती बंद करवाया गया, जिसकी वजह से राज्य के लाखों छात्रों का शैक्षणिक कैरियर संकट में पड़ गया। 23 जुलाई को कमांडो के साथ कथित मुठभेड़ में एक युवक के मारे जाने की घटना के बाद मणिपुर सरकार और प्रमुख सामाजिक संगठन अपुनबा लूप के बीच ठन गई और तीन छात्र संगठनो ने कक्षाओं के बहिष्कार का ऐलान कर दिया। अपुनबा लूप ने 28 वर्ष के चुंगखाम संजीत की हत्या के खिलाफ आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के इस्तीफे और घटना में शामिल पुलिस कमांडो की बर्खास्तगी और उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की।

संजीत की मौत के बाद सिंह ने ऐलान किया था कि पुलिस के साथ मुठभेड़ में एक पूर्व आतंकवादी मारा गया, लेकिन कुछ दिन बाद नयी दिल्ली की एक पत्रिका ने कुछ तस्वीरें प्रकाशित कीं, जिनमें दिखाया गया था कि पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद संजीत को मार डाला गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के दबाव के सामने झुकते हुए सिंह ने संजीत की हत्या के हालात का पता लगाने के लिए न्यायमूर्ति पीसी अग्रवाल के नेतृत्व में एक न्यायिक आयोग का गठन किया। अपुनबा लूप के अनुसार आयोग के गठन की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि प्रकाशित तस्वीरों में यह दिखाया गया है कि संजीत फर्जी मुठभेड़ में मारा गया। मुठभेड़ में गोली लगने से एक गर्भवती महिला भी मारी गई और पांच अन्य घायल हुए।

कक्षाओं के लगातार बहिष्कार के कारण विभिन्न अभिभावक संगठनों, शिक्षक संगठनों, सामाजिक संगठनों और अन्य नागरिक निकायों ने राज्य सरकार से हड़ताली छात्रों और अपुनबा लूप के साथ मामला जल्द निपटाने का आग्रह किया ताकि कक्षाओं में पढ़ाई फिर शुरू हो सके।

इस वर्ष के शुरू में कुछ नगा उग्रवादियों ने एक युवा अनुमंडलीय अधिकारी और उसके दो मातहत कर्मचारियों की हत्या कर दी। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष राज्य में कुल 480 लोग मारे गए। इनमें 270 संदिग्ध आतंकवादी और 22 नागरिकों के अलावा कुछ सुरक्षा और पुलिसकर्मी शामिल हैं। गैर मणिपुरी विस्थापित मजदूर और कुछ छोटे व्यापारी भी आतंकवादियों का निशाना बने । आतंकवादियों ने विभिन्न घटनाओं में 20 से अधिक मजदूरों और छोटे व्यापारियों को अपना निशाना बनाया।

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  • Web Title:मणिपुरः हमले, हत्या और बहिष्कारों का बोलबाला रहा