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महाराष्ट्र: राजनीतिक घटनाक्रमों से भरा रहा पूरा साल

विदा लेने जा रहे वर्ष 2009 में महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की हैट्रिक, विधानसभा में राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का खाता खुलना और शिवसेना के प्रभाव में कमी प्रमुख घटनाएं रहीं।

मुंबई हमलों के दौरान उप मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले आरआर पाटिल की सरकार में वापसी हुई और एक बार फिर गृह मंत्रालय उन्हें मिल गया। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल, गृह मंत्री पाटिल और मुख्य सचिव जेपी डांगे के खिलाफ मुंबई हमलों की जांच करने वाले राम प्रधान पैनल की रिपोर्ट कथित तौर पर लीक होने के आरोप में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया।

आरोपों को खारिज करते हुए चव्हाण ने कहा हम रिपोर्ट की प्रति की प्रामाणिकता की जांच करेंगे। इससे पहले, महंगाई, बिजली संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहे राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन ने तीसरी बार बहुमत हासिल कर सत्तासीन होते हुए हैट्रिक बनाई। 13 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में एक दशक पुराने गठबंधन ने 288 सदस्यीय विधानसभा में आधी सीटें जीत लीं। शिवसेना भाजपा गठबंधन को 90 और मनसे को 13 सीटें मिलीं।

कांग्रेस 82 सीटें जीत कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। राकांपा को 62 सीटें मिलीं। भाजपा को 46 सीटें और व सेना को 44 सीटें मिलीं। लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों में शिवसेना के फीके प्रदर्शन के बाद पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे क्योंकि मनसे ने दोनों चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

नतीजा यह हुआ कि 83 वर्षीय बाल ठाकरे शिवसेना के मामलों में एक बार फिर सक्रिय हो गए। बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत के वारिस उद्धव ने कहा बालासाहेब माह में एक या दो बार सेना भवन आएंगे।

क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर शिवसेना प्रमुख के कोपभाजन का कारण बने। सचिन की टिप्पणी मुंबई सबके लिए ठाकरे को रास नहीं आई और उन्होंने कहा कि तेंदुलकर क्रिकेट की क्रीज छोड़ कर राजनीति की पिच पर आ गए हैं जिससे मराठियों को धक्का लगा है। तेंदुलकर ने कहा था मैं महाराष्ट्रियन हूं और इसका मुझे गर्व है। लेकिन सबसे पहले, मैं भारतीय हूं और मुंबई सभी भारतीयों की है।

भगवा गठबंधन के दोनों साझीदारों के रिश्ते भी तनाव से गुजरे क्योंकि शिवसेना के नेताओं को लगा कि भाजपा मनसे को आम विपक्ष मानने के लिए तैयार है। इस साल विधानसभा चुनावों में मनसे ने खाता खोला लेकिन मराठी में शपथ लेने के पार्टी के फरमान को न मानने वाले एक विधायक पर हमला करने के आरोप में मनसे के चार विधायक निलंबित भी कर दिए गए।

मराठी और गैर मराठी के मुद्दे पर चुनाव प्रचार करते हुए मनसे ने चुनाव में शिवसेना के मतों को खूब विभाजित किया। भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा कि हम इसलिए हारे क्योंकि मनसे ने शिवसेना के परंपरागत वोट झटक लिए।

राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों पर मायावती की बसपा ने चुनाव लड़ा लेकिन उसे नाकामी मिली। विधानसभा चुनाव हारने वाले दिग्गजों में राकांपा के वरिष्ठ मंत्री विजयसिंह मोहिते पाटिल और चव्हाण सरकार के कुछ मंत्री तथा भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन हैं।

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के पुत्र राजेंद्र शेखावत ने कांग्रेस के विद्रोही उम्मीदवार और मंत्री सुनील देशमुख को हराया।
 विदर्भ में कर्ज से लदे किसानों की आत्महत्या सुर्खियां बनी। इस क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों में से अधिकतर पर दो दर्जन से अधिक कांग्रेस-राकांपा प्रत्याशी विजयी हुए। पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के केंद्र के फैसले की पृष्ठभूमि में पृथक विदर्भ राज्य बनाने की मांग भी उठी जिससे शिवसेना भाजपा गठबंधन की कलह भी सामने आ गई।

भाजपा पृथक विदर्भ के पक्ष में और शिवसेना राज्य के विभाजन के विरोध में है। बाल ठाकरे की बहू स्मिता ठाकरे ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की सार्वजनिक तौर पर प्रशंसा करके कांग्रेस से जुड़ने के संकेत दिए। राज्य के भाजपा दिग्गज और प्रशासनिक कौशल के लिए चर्चित नितिन गडकरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए। भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि अब राज्य में पार्टी के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी।

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