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महंगाई के बोझ तले दबे रहे दिल्लीवासी

चौतरफा महंगाई के बोझ तले दबे दिल्लीवासी वर्ष 2009 में पूरे साल राज्य सरकार के कडे़ निर्णयों से भी हलकान रहे। भीषण महंगाई के दौर में स्कूल फीस में वृद्धि,बस और मेट्रो रेल भाडे़ में बढो़तरी, बिजली तथा पानी की दरों में इजाफे से लोगों का बजट पूरी तरह चरमरा गया।

पिछले वर्ष के अंत में हुए विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अगुवाई में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस की सरकार से राजधानी के लोगों को जो राहत की उम्मीदें थीं, वह एक-एक कर के गायब होती गई। दिल्ली की सरकार ने लोगों में जनवरी में ही छठे वेतन आयोग को लागू करने के लिए निजी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में फीस वृद्धि का फैसला किया। सरकार ने स्कूल फीस में वृद्धि के लिए बंसल कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाया। हालांकि फीस वृद्धि पर सरकार को अदालत से फटकार भी लगी, किंतु लोगों पर पड़ने वाला बोझ इसके बावजूद कम नहीं हुआ।

सरकार ने स्कूल की फीस में 100 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की वृद्धि ही नहीं की बल्कि वेतन आयोग के एरियर का भुगतान करने के लिए अभिभावकों को चार हजार रुपये तक अदा करने का फरमान भी सुनाया। सरकार के इस फैसले का चौतरफा विरोध हुआ। बच्चों की स्कूल फीस में वृद्धि से बढे़ बोझ का गणित बिठाने में दिल्ली के लोग लगे ही हुए थे कि राज्य सरकार ने मई में हुए आम चुनाव के बाद बिजली पर दी जा रही सब्सिडी को वापस लेने की घोषणा कर दी।

बिजली के भागते मीटर और निजी बिजली वितरण कंपनियों की मनमानी से पहले ही परेशान जनता का दर्द सब्सिडी को वापस लेने से और बढ़ गया। बिजली दरों में वृद्धि के बोझ से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने दस प्रतिशत की सब्सिडी 2005 में शुरू की थी। इसे 31 मई 2009 से समाप्त कर दिया गया। इसके बाद बिजली सबसिडी के दायरे में केवल वह उपभोक्ता रह गए जो अधिकतम मांग के बाद में 200 यूनिट और कम मांग वाले महीनों में 150 यूनिट तक खपत करने वाले थे।

दिल्ली में अगले साल राष्ट्रमंडल खेल होने हैं। वर्ष 2009 में सरकार ने कर से प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी को देखते हुए संसाधन जुटाने के लिए कडे़ फैसले का क्रम जारी रखा। नवम्बर में सरकार ने दिल्ली परिवहन निगम [डीटीसी] के निरंतर बढ़ते घाटे का बोझ कम करने के लिए बस किराए में भारी वृद्धि करने का कठोर फैसला राजधानी के लोगों पर लाद दिया। इस फैसले में डीटीसी के बस किराए में वृद्धि ने महंगाई से पहले ही परेशान जनता की मुश्किलें और बढा़ई। सरकार को इस फैसले से सालाना 400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।

डीटीसी बस में किराया वृद्धि को लेकर सत्तारुढ़ कांग्रेस दल में भी नाराजगी दिखाई दी और सरकार को इसमें मामूली फेरबदल के लिए मजबूर होना पडा़। पुराने किराए तीन, पांच, सात और दस रुपये की तुलना में सरकार ने केवल तीन स्लैब पांच, दस और पन्द्रह रुपये तय किए। इतना ही छात्रों के लिए साढे़ बारह रुपये के बस पास की राशि को बढा़कर 100 रुपये किया गया। मेट्रो रेल सेवा के किराए में बढो़तरी ने भी लोगों की जेब को हल्का करने में पूरी मदद की।

सरकार के इन कठोर फैसले की श्रृखंला में पानी की दरों में वृद्धि के फैसले से लोगों की मुसीबतें और बढेगी। पानी की दरों में एक जनवरी 2010 से वृद्धि लागू की जाएगी। राजस्व बढा़ने के लिए सरकार ने मूल्यवर्धित कर प्रणाली [वैट] के चार प्रतिशत के स्लैब में भी एक प्रतिशत की वृद्धि की। सरकार के इस फैसले से भी लोगों की दिक्कतें बढी़, क्योंकि इस दायरे में अधिकतर वह वस्तुएं आती हैं जो रोजमर्रा के इस्तेमाल की हैं।

हालांकि सरकार ने कुछ मौकों पर लोगों को राहत दिलाने का भी प्रयास किया, लेकिन वह उक्त कठोर फैसलों के आगे ऊंट के मुंह में जीरे का सामान था। दालों की कीमतों में बेतहाशा तेजी को देखते हुए सरकार ने दाल मिल एसोसिएशन के साथ मिलकर अधिक खपत वाली दालों को बाजार से कम दर पर बेचने का प्रयास किया। किंतु उसका यह प्रयास बहुत सार्थक नहीं रहा। इसके अलावा बाजार से काफी कम कीमत पर आटा बेचकर भी लोगों को राहत देने की कोशिश की गई।

इस सबके बीच दिल्ली के लोगों के लिए राहत की बात यह रही कि रसोई गैस के सिलेंडर पर मिलने वाली चालीस रुपये की सबसिडी को सरकार ने वापस नहीं लिया और इसे जारी रखने का फैसला किया। राजधानी में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की परियोजनाओं के समय से काफी पीछे रहने को लेकर पूरे साल सरकार की किरकरी होती रही। दीक्षित ने कई मौकों पर खेल परियोजनाओं के संबंध में जो बयान दिए वह मीडिया में खासी सुर्खियों में रहे।

इस सबके मध्य विपक्ष की भूमिका कोई जोरदार नहीं रही और छिटपुट धरना-प्रदर्शनों और बयानों के अलावा ऐसा कुछ नजर नहीं आया जिससे कि सरकार पर दबाव बन सके। माडल जेसिका लाल हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त मनु शर्मा को पैरोल का मामला भी खासी सुर्खियों में रहा। इसे लेकर मुख्यमंत्री की खासी फजीहत हुई। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मनु शर्मा को पेरोल पर रिहा किए जाने और बाद में अवधि को एक माह और बढा़ए जाने की सिफारिश का मामला इतना गरमाया कि मनु को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पडा़।

राष्ट्रमंडल खेलों के मद्दे नजर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने और ब्लू लाइन बसों को चरणबद्ध तारीके से हटाने के लिए डीटीसी के बेडे़ में शामिल लो फ्लोर बसों में आग की घटनाएं भी वर्ष के दौरान खासी चर्चा में रहीं।

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