class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अर्थशास्त्र निराशापूर्ण विज्ञान नहीं : मनमोहन

अर्थशास्त्र निराशापूर्ण विज्ञान नहीं : मनमोहन

अर्थशास्त्र से ताल्लुक नहीं रखने वाले लोग अक्सर इस विषय को निराशापूर्ण विज्ञान बताते हैं। इसका कारण अर्थशास्त्र का उन विषयों पर ध्यान केंद्रित करना है जिसका हल मुश्किल जान पड़ता है। बहरहाल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इससे इत्तेफाक नहीं रखते।

इंडियन इकोनोमिक एसोसिएशन के 92वें सालाना सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा कि मुझे लगता है कि यह गुमराह करने वाला विश्लेषण है। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्र निराशापूर्ण विज्ञान इसलिए लगता है क्योंकि अर्थशास्त्री प्राय: ऐसे विषय को उठाते हैं जिनका हल मुश्किल लगता है। प्राय: ऐसी समस्याएं उन लोगों की स्थिति से जुड़ी होती हैं जो पर्याप्त प्रगति नहीं कर पाते हैं अथवा जिनकी प्रगति भविष्य में बाधित हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने जनसंख्या के बारे में अर्थशास्त्री थामस माल्थस के विचारों का जिक्र किया जिन्हें संभवत: सर्वाधिक निराशापूर्ण आकलन माना जाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भविष्यवाणी अत्यंत निराशाजनक की श्रेणी में आएगा।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस प्रकार का विश्लेषण बेहद अनिवार्य कार्य है। ये चीजें बुनियादी समस्याओं के प्रति ध्यान आकर्षित करती है। इन समस्याओं का अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया तो वह गंभीर स्थिति में पहुंच जाएगी जिससे निपटना कठिन होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अर्थशास्त्र निराशापूर्ण विज्ञान नहीं : मनमोहन