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स्वास्थ्य की दृष्टि से मिला-जुला रहा साल

स्वास्थ्य की दृष्टि से वर्ष 2009 मिला जुला रहा। स्वाइन फ्लू, पोलियो और डेंगू के मामलों में पहले की अपेक्षा वृद्धि, दिल्ली हाई कोर्ट का समलैंगिक यौन व्यवहार को प्रभावी तौर पर अपराध मुक्त करते हुए धारा 377 को भारतीय दंड संहिता से निकालने का ऐतिहासिक फैसला, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की संचालन समिति की वलियाथन समिति की सिफारिशों पर मोहर और एम्स की तर्ज पर बनने वाले 6 संस्थानों के कार्यों में तेजी जैसे मामले पूरे साल चर्चा में रहे।

केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य की दृष्टि से वर्ष 2009 काफी सफल रहा, महात्वाकांक्षी कार्यक्रम राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के दूरगामी परिणाम सामने आने लगे हैं और आम लोगों विशेष रूप से देश के ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज इलाकों के लोगों के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हुई हैं। स्वाइन फ्लू, एचआईवी एडस ,पोलियो और अन्य घातक बीमारियों की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि लोगों को देश की विशाल जनसंख्या को ध्यान में रखकर ही उपलब्ध सुविधाओं के बारे में आंकलन करना चाहिए।

देश में स्वाइन फ्लू का पहला मामला 13 मई को सामने के बाद से इसके वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता रहा। राजधानी दिल्ली सहित लगभग पूरे देश को यह रोग अपनी चपेट में ले चुका है। इस रोग से सबसे अधिक प्रभावित महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान हैं। सरकार ने इसके लिए स्वदेशी टीका बनाने का फैसला किया है जिसके अगले साल जून तक तैयार होने की संभावना है।

सरकार ने स्वाइन फ्लू के नियंत्रण के लिए कार्य कर रहे लोगों, डाक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों के लिए इस महीने के अंत तक विदेशी टीका आयात करने का फैसला किया है। इस रोग से अब तक 800 लोगों की मौत हो चुकी है और 23 हजार लोगों के इसके वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है।

डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने देश के सभी लोगों को समय पर उचित और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए छह राज्यों बिहार, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान और उत्तराखंड में अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान की तर्ज पर खोले जा रहे संस्थानों का निर्माण कार्य अगले साल फरवरी से शुरू कराने का फैसला किया है और इसके लिए वित्तीय व्यवस्था कर ली गयी है।

इसके अलावा देश के विभिन्न भागों में चल रहे 18 मेडिकल कालेजों का भी उन्नयन करने की घोषणा की गई है ताकि देश में चल रही डाक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके।

पोलियो का कहर भारी प्रयासों के बाद भी उत्तर प्रदेश और बिहार में जारी है इसके मामले निरंतर बढ़ते ही जा रहे है अब तक उत्तर प्रदेश में 556 और बिहार में 111 मामले सामने आ चुके है। कुल नौ राज्य इसकी चपेट में हैं। सरकार ने इस रोग के बढ़ते प्रसार को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही पोलियो की नई दवा (बाईवेलैंट ओरल पोलियो वैक्सीन) शुरू करने की घोषणा की है। इससे पोलियो के दोनों वायरस पी1 और पी3 पर एक साथ काबू पाया जा सकेगा। देश में इस साल 20 दिसंबर तक पोलियो के कुल 685 मामले सामने आ चुके हैं।

भारत के दवा महानियंत्रक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक मंदी का देश की चिकित्सा सेवाओं पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस दौरान दवाओं के मूल्यों में वृद्धि हुई, लेकिन इससे साथ-साथ जीवनदायिनी दवाओं और अन्य दवाओं के मूल्यों में कमी की गयी है। चिकित्सा क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों में तेजी आयी है और नई नई दवाओं का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि विदेश से भारतीय डाक्टर वापस लौट रहे हैं।

भारत में पिछले कुछ सालों में हेल्थकेयर उद्योग तेजी से उभर रहा है और आज यह एक लाख 64 हजार 500 करोड़ रूपये तक पहुंच चुका है। वर्ष 2012 तक इसके तीन लाख 52 हजार 500 करोड़ रूपये तक पहुंचने का अनुमान है।

सरकार ने दावा करते हुए कहा कि वह शीघ्र ही एक ऐसा 'राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल' लायेगी जिसके माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं की जानकारी ली जा सकेगी और अपने नवजात शिशु के नाम पंजीकरण आन लाइन कराये जा सकेंगे। इसके अलावा बच्चों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने के लिए अलग से एक ई-स्वास्थ्य कार्ड बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है इस संबंध में शीघ्र ही निर्णय लिये जाने की संभावना है।

अंग प्रत्यारोपण अधिनियम-1994 में संशोधन करने की मांग काफी समय से चली आ रही थी मंत्रालय ने इस मांग को पूरा करने के लिए इसमें संशोधन कर दिया और इससे अंग प्रत्यारोपित कराने वाले के लिए रास्ता कुछ आसान कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट का समलैंगिक यौन व्यवहार को प्रभावी तौर पर अपराध मुक्त करते हुए धारा 377 को भारतीय दंड संहिता से निकालने का ऐतिहासिक फैसला काफी चर्चा का विषय रहा। इसका भारी समर्थन और विरोध हुआ और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

संयुक्त राष्ट्र एडस नियंत्रण कार्यक्रम (यूएनएडस) के कार्यकारी निदेशक माइकल सिडिबे ने एडस के संबंध में कार्रवाई और समलैंगिक आचरण को अपराध मुक्त करने की दिशा में भारत द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

देश में मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की तेजी से बढ रही घटनाओं पर नियंत्रण और बचाव के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया है और इसके लिए अलग से 1660 करोड़ रूपये की राशि रखी गयी है।

यूनिसेफ की प्रबंध निदेशक ए एन विनीमान का कहना है कि खसरे से विश्व में होने वाली बच्चों की कुल मौतों के चार में से तीन मामले भारत में आते है। इस बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार को अपने टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक व्यापक और मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।

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