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सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए रहा कठिन साल

सत्यम घोटाला, मंदी और नियुक्तियों पर रोक जैसी घटनाओं के चलते बीता साल भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग के लिए कठिन रहा और इसकी साख पर ही सवालिया निशान लग गया।

सत्यम कंप्यूटर्स के संस्थापक ने सात जनवरी को कंपनी के खातों में घपले की बात स्वीकारी। यह घपला अनुमानित 7,800 करोड़ रुपया का है जिसने भारत के आईटी उद्योग की प्रतिष्ठा ही दाग पर लगा दिया।

इस घटना के कुछ ही दिन बाद विश्व बैंक ने सत्यम, विप्रो तथा मेगासॉफ्ट पर इस संस्थान के साथ काम करने पर रोक लगा दी। इन कंपनियों पर बैंक कर्मचारियों को 'अनुचित लाभ' देने का आरोप था।

मंदी के कारण विशेषकर यूरोप व अमेरिकी कंपनियों ने आईटी खर्च खटाया जिसका असर भारत की आईटी कंपनियों की आय पर रहा। इन्फोसिस सहित अनेक सॉफ्टवेयर कंपनियों ने नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी।

इन्फोसिस के नंदन निलेकानी कंपनी छोड़कर सरकार की हर नागरिक को विशेष नंबर देने की महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े। इसी साल ओरेकल ने कहा कि वह सन माइक्रोसिस्टम्स को खरीदेगी।

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