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मंदी की मार से कमजोर हुआ स्टील

वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी मंदी का असर इस वर्ष स्टील उद्योग पर भी दिखा। सरकार ने शुल्क में कटौती और बुनियादी ढांचा पर व्यय में बढ़ोतरी की लेकिन स्टील कंपनियों को ज्यादा राहत नहीं मिली। हालांकि यह भी सही है कि भारत का स्टील उद्योग अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में रहा।

बहरहाल 2009 के अंत तक मांग में सुधार और आने वाले दिनों से स्टील उद्योग जरूर थोड़ी राहत में है। पिछले साल अक्टूबर में वैश्विक स्तर पर मंदी के कारण जब मांग में कमी हुई तो कंपनियों ने बाजार में टिके रहने के लिए लागत कम करने को लेकर छंटनी समेत अन्य उपाय किए। लेकिन इस साल नवंबर में कार की बिक्री में 60 फीसदी की बढ़ोतरी से कारखाना उत्पादन बढ़ा। साथ ही निर्माण क्षेत्र में तेजी से स्टील की मांग में कुछ सुधार देखने को मिला।

इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट भारत की आर्थिक वृद्धि को ज्यादा प्रभावित करने में असफल रहा है। मांग में बढ़ोतरी से स्टील क्षेत्र में जनवरी से सुधार दिखने की उम्मीद है। निश्चित रूप रूप से अन्य उपायों समेत स्टील पर उत्पाद शुल्क को 16 फीसदी से घटाकर 8 फीसद किए जाने का असर दिखा।

वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन ने भी वर्ष 2009 में स्टील की मांग में बढ़ोतरी का अनुमान पूर्व के 2 फीसदी से बढ़ाकर लभग 9 फीसदी कर दिया है। अप्रैल-नवंबर अवधि में भारत में स्टील खपत 8.1 फीसदी बढ़कर 3.597 करोड़ टन रहा।

स्टील कंपनियों को उम्मीद है कि मांग में बढ़ोतरी से वर्ष 2010 में स्टील की मांग बढ़ेंगी। देश की अग्रणी स्टील उत्पादक कंपनी सेल ने पिछले दो महीने में कीमतों में कटौती की है, लेकिन अब वह जनवरी में दाम में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है।

सेल के चेयरमैन एस के रूंगटा ने कहा कि हम जनवरी में कीमत बढ़ा सकते हैं क्योंकि बाजार में सुधार हो रहा है। निजी क्षेत्र की जेएसडब्ल्यू स्टील, एस्सार स्टील, इंस्पात इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां भी इसी प्रकार का कदम उठाने पर विचार कर रही हैं। स्टील की कीमत फिलहाल घरेलू बाजार में 27,000-40,000 रुपये प्रति टन है।

वित्तीय बाजार में सुधार के साथ स्टील मंत्रालय ने एनएमडीसी, मैगनीज ओर इंडिया लि. (एमओआईएल) औरसेल में हिस्सेदारी बेचे जाने का जिक्र किया है। विनिवेश विभाग ने सेल में प्रस्तावित 20 फीसदी अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) लाए जाने औरएमओआईएल में 10 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश पर काम कर रहा है।

स्टील कंपनियों को इस साल विनियामक समस्या का भी सामना करना पड़ा। दक्षिण कोरिया की पोस्को, और एलएन मित्तल की आर्सेलर-मित्तल को अभी जमीन अधिग्रहण समेत विभिन्न नियामक मंजूरी का इंतजार है।

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