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बीते साल में सिमटा संगठित खुदरा क्षेत्र

भारत के खुदरा क्षेत्र में इस वर्ष चमक गायब रही क्योंकि ग्राहक मंदी के कारण जेब से बड़ी रकम निकालने से बचते रहे। इसके कारण कुछ कंपनियों को अपने वित्तीय ढांचे का पुनर्निर्धारण करना पड़ा जबकि मंदी की मारी पश्चिमी देशों की कंपनियां इस बात से खुश हुई होंगी कि उन्हें देश में व्यवसाय खोलने की इजाजत नहीं मिली।

हालांकि वाम दलों के सहयोग के बिना ही संप्रग सरकार सत्ता में लौटी लेकिन उसने 450 अरब डॉलर के देश के खुदरा कारोबार में पश्चिमी देशों की बहु-ब्रांड वाली खुदरा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को बाजार में आने की अनुमति नहीं दी। लेकिन फिलहाल कोई भी इसकी शिकायत नहीं कर रहा है क्योंकि मंदी से प्रभावित ये कंपनियां अभी अपने मौजूदा परिचालन को ही दुरूस्त करने में लगी हैं।

घरेलू कंपनियों के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा। सबसे पुरानी खुदरा श्रृंखला सुभिक्षा को अपनी दुकान बंद करने पड़ी, वहीं विशाल रिटेल को ऋण पुनर्निर्धारण करना पड़ा। इसके अलावा मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस रिटेल और किशोर बियानी के स्वामित्व वाली पैंटालून ने या तो अपनी विस्तार योजना को धीमा किया या फिर अपने परिचालन आकार को छोटा किया। छोटे खुदरा दुकानदारों की स्थिति के बारे में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

बहरहाल पिछली तिमाही में बाजार में कुछ विश्वास लौटा है, लेकिन कुल मिलकार यह वर्ष इस क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। भारतीय कंपनियां ने जहां संभलकर कदम आगे बढ़ाए, वहीं कुछ विदेशी कंपनियों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए भारतीय बाजार में पांव पसारने से मना कर दिया। इनमें फर्नीचर बनाने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी आईकिया भी शामिल है।

स्वीडन की इस कंपनी की एकल ब्रांड में खुदरा खंड में कदम रखने की योजना थी, लेकिन फर्म ने एफडीआई पर 51 फीसदी की सीमा का हवाला देते हुए भारतीय बाजार में आने से मना कर दिया। कंपनी एफडीआई में और छूट चाहती थी।
  
त्योहारी मौसम के दौरान पिछली तिमाही में बाजार में विश्वास लौटता दिखा और कुछ खुदरा कंपनियों ने आने वाले साल में विस्तार की योजना का खुलासा किया। साल की शुरूआत चेन्नई की सुभिक्षा ट्रेडिंग सर्विसेज लि. के दिवालिया होने से हुई। कंपनी ने नकदी संकट के कारण अपने सभी 1,600 स्टोर बंद कर दिए। इससे 5,000 कर्मचारी बेरोजगार हो गए। कंपनी ऋण पुनर्गठन पर काम कर रही है।

इसी तरह 730 करोड़ रुपये के ऋण के कारण दिल्ली सुपरमार्केट श्रृंखला विशाल रिटेल को भी ऋण पुनर्गठन करना पड़ा। इससे पहले कंपनी ने इस वर्ष की शुरुआत में विस्तार योजना को रोक दिया था। इतना ही नहीं देश की अग्रणी खुदरा क्षेत्र की कंपनी किशोर बियाणी प्रवर्तित फ्यूचर ग्रुप को भी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और कंपनी को अपने परिचालन का पुनर्गठन तथा 6 अलग-अलग खंडों में विलय करना पड़ा।

कुछ महीने पहले फ्यूचर समूह ने सुपरमार्केट श्रृंखला बिग बाजार को अलग इकाई के रूप में किए जाने और चालू वित्त वर्ष के अंत तक बाजार में इसे सूचीबद्ध कराने की योजना का खुलासा किया था। बियाणी ने कहा कि कंपनी 2014 तक 155 बिग बाजार खोलेगी। इससे उसके स्टोरों की संख्या बढ़कर 275 हो जाएगी।

भारती की एकल ब्रांड खुदरा श्रृंखला ईजी-डे उत्तर भारत में निरंतर विस्तार कर रही है। कंपनी की अगले साल के अंत तक अपने खुदरा केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 200 करने योजना है। कंपनी के पास फिलहाल 70 स्टोर हैं।
  
कूटॉन्स रिटेल ने भी अपने ब्रांड कूटान्स फैमिली स्टोर के तहत विभिन्न फॉर्मेट के विलय की योजना का खुलासा किया है। साथ ही कंपनी की 100 और खुदरा केंद्र खालने की योजना है। शॉपर्स स्टॉप की अगले तीन साल में 15 और नए स्टोर खोलने की योजना है और कंपनी इसके लिए 250 करोड़ रुपये निवेश करेगी।

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