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रीयल्टी एस्टेट को मिला को बैंकों का साथ

2008 में हुई गिरावट से सबक लेने के बाद रीयल्टी एस्टेट कंपनियों ने 2009 में किफायती घर का नया मंत्र खोजा। साथ ही बैंकों ने भी इस दौरान आवास ऋण सस्ता किया, जिससे रीयल्टी कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिली।

इस वर्ष भी कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट आई तथा प्रॉपर्टी बाजार के मंदी के कगार पर पहुंचने के कारण नकदी संकट से जूझ रहे रीयल्टी क्षेत्र की कंपनियों को अपने बढ़ते कर्ज बोझ को कम करने के लिए परिसंपत्तियों और शेयरों की बिक्री करनी पड़ी।
    
फिर भी धन उगाहने की भूख इतनी ज्यादा थी कि जैसे ही शेयर बाजार में एक उपयुक्त स्तर तक की तेजी लौटी, करीब 10 रीयल्टी कंपनियों ने 12,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आरंभिक सार्वजनिक पेशकश ( आईपीओ) लाने की अपनी योजना की घोषणा कर डाली।

वैश्विक संपत्ति परामर्शक जोन्स लैंग लसाले मेघराज के चेयरमैन एवं कंट्री प्रमुख अनुज पुरी ने बताया कि सभी तीन खंडों (आवास, कार्यालय और खुदरा) की प्रॉपर्टी कीमतों में पिछले वर्ष के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट आई।

डीएलएफ और यूनिटेक जैसी कंपनियों को इस साल बाजार की वास्तविकता पता चली। इन कंपनियों द्वारा सिर्फ लग्जरी आवासीय परियोजनाओं पर ध्यान देने की रणनीति भूल साबित हुई। डीएलएफ लिमिटेड के उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने जनवरी में कहा था कि हमारा ध्यान मध्यम आय वाले घर एवं व्यावसायिक परिसरों पर केंद्रित होगा। अधिक मार्जिन वाले लग्जरी आवास एवं खुदरा जगहों के मामलो को अभी टाला जाएगा।
 
यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा ने भी कहा कि हमने भारत की आबादी के शीर्ष दो-तीन प्रतिशत लोगों पर ध्यान केंद्रित करने की गलती की। अब हम आम लोगों तक पहुंचना चाहते हैं, उनके बजट और सस्ते आवास की परिकल्पना में फिट होना चाहते हैं।

केंद्र सरकार भी केवल सस्ते आवास के लिए सहायता उपलब्ध कराने को इच्छुक थी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कहा गया कि वैश्विक आर्थिक मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने वाले उपायों के तहत 20 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर ब्याज दर को वे कम करें।

निजी बैंकों ने भी इस मुहिम में शामिल हुए और वर्ष के उत्तरार्ध में आवास ऋण के बाजार में हलचल थी और उनमें कम ब्याज दर पर आवास ऋण देने की होड़ सी मची थी। परिणामस्वरूप ब्याज दरें आठ प्रतिशत तक नीचे आ गई।

यूनिटेक ने घोषणा की कि वह आवास श्रेणी में नंबर एक स्थान लेना चाहती है जहां उसकी दो वर्षों में 20,000 सस्ते आवास निर्माण करने की योजना है। डीएलएफ ने भी सस्ते मकान की दौड़ में कूदते हुए देश के प्रमुख शहरों में 20 लाख रुपये से कम लागत वाले मकानों की एक लाख इकाइयां बनाने की योजना बना डाली।

जो डेवलपर्स धन नहीं जुटा पाए उन्हें परियोजनाओं से पीछे हटना पड़ा जैसे कि बीपीटीपी। दिल्ली स्थित इस कंपनी को भुगतान करने में विफल रहने के कारण देश के सबसे बड़े भूमि सौदे में से कुछ हिस्से को लौटाना पड़ा।
    
वर्ष के उत्तरार्ध में देश की अर्थव्यवस्था में सुधार दिखने लगा। मांग में बढ़ोतरी और शेयर बाजार की तेजी को महसूस करते हुए रीयल एस्टेट कंपनियों ने अवसर को पहचाना और पूंजी बाजार में उतर पड़ीं।
    
एम्मार एमजीएफ और सहारा सहित प्रमुख रीयल एस्टेट कंपनियों ने सम्मिलित रूप से 12,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए अपनी-अपनी सार्वजनिक आरंभिक पेशकशों को लेकर सेबी के समक्ष दस्तावेज जमा किए। गोदरेज प्रॉपर्टीज ने भी आईपीओ से 500 करोड़ रुपये जुटाए।

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  • Web Title:रीयल्टी एस्टेट को मिला को बैंकों का साथ