अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भारत में चुनावी मुद्दा बना काला धन

नकदी की कमी से जूझ रही वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनैतिक पहल से इस साल काले धन की शरणगाहों की असलियत का खुलासा सामने आना शुरू हुआ, लेकिन अब तक सिर्फ अमेरिका ही स्विस खातों का ब्यौरा हासिल करने में समर्थ रहा है जबकि भारत सिर्फ बैठकें आयोजित करने की गुंजाइश पैदा कर सका है।

काफी जद्दोजहद के बाद अमेरिका-स्विट्जरलैंड के बीच हुए समझौते से इंटर्नल रेवेन्यू सर्विस को 4,450 गोपनीय खातों तक पहुंचने में मदद मिली। इस समझौते से द्विपक्षीय संबंध भी जोखिम में पड़ गया था। इस पूरी प्रक्रिया ने स्विट्जरलैंड की बैंकिंग गोपनीयता के तरीकों में भी दरार डाली।

भारत ने भी इस उम्मीद में स्विट्जरलैंड का रूख किया कि कुछ सुराग मिले सके लेकिन वह जिनीवा में गोल-मेज चर्चा के आगे नहीं बढ़ पाया। अनुमान है कि काले धन की शरणगाहों में 11,000 अरब डॉलर जमा है, जो वैश्विक वित्तीय संकट से मुकाबले के लिए विश्व भर में घोषित प्रोत्साहन पैकेज के दोगुने से भी ज्यादा है।

जी-20 देशों के नेता इस धन को वापस लेने की कवायद कर रहे हैं। इस साल अप्रैल में इन नेताओं ने काले धन की शरणगाहों पर हमला बोलने के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

चुनावी मुद्दा बना काला धन
भारत में काला धन मामले में विदेश में जमा धन चुनावी मुद्दा बन गया। भाजपा और वामपंथी दलों ने अनुमान लगाया कि भारतीयों ने इन शरणगाहों में करीब 1,500 अरब डॉलर जमा कर रखे हैं। हालांकि सरकार ने काले धन के मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट से कहा कि इस बारे में कोई मौलिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इससे बहुत पहले 1999 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक अरूण कुमार ने अनुमान लगाया था कि करीब 4,87,185 करोड़ रूपए का काला धन है, जो उस वक्त सकल घरेलू उत्पाद का 40 फीसदी था।

भारत ने स्विट्जरलैंड और मारिशस समेत 25 देशों के साथ कर संधियों में संशोधन और 51 अन्य देशों के साथ इस संबंध में पुनर्विचार करने की योजना बनाई है ताकि काले धन को ढूंढा जा सके। कई देशों ने खातों के ब्यौरों को जाहिर करने की मांग करना शुरू कर दिया है जिसके मद्देनजर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने कहा कि इन शरणगाहों के खिलाफ कोशिश में बहुत प्रगति हुई है।

ओईसीडी के अधिकारी ने पेरिस से बताया कि अब तक विभिन्न देशों कर चोरी के धन संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए अब तक 80 समझौते किए हैं, यह अपने आप में ओईसीडी की पहल में प्रगति को जाहिर करता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भारत में चुनावी मुद्दा बना काला धन