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अरिहंत के साथ और मुस्तैद हुई भारतीय सीमाएं

बीते साल भारत ने स्वदेश में निर्मित पहली परमाणु पनडुब्बी के जलावतरण के साथ ही विशिष्ट देशों के क्लब में शामिल होने के अलावा जल, थल और हवा से प्रक्षेपास्त्र दागने की क्षमता हासिल कर ली। इसी साल रूस के साथ अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा किया गया और परमाणु हमले से बचाव में सक्षम स्वदेश निर्मित मुख्य युद्धक टैंक टी-90 की पहली खेप भी इसी साल सेना को सौंपी गई।
   
अचूक अरिहंत
भारत 26 जुलाई को स्वदेश में निर्मित पहली परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के जलावतरण के साथ ही विशिष्ट देशों के क्लब में शामिल हो गया। 60,000 टन वजन की अरिहंत में सागरिका बैलेस्टिक मिसाइल लगी हैं जो दुश्मन के परमाणु हमले की सूरत में उसका मुंहतोड़ जवाब दे सकती हैं। इसकी मारक क्षमता 700 किलोमीटर है।  अपने निर्माण स्थल आईएनएस वीरभव से बंगाल की खाड़ी में जैसे ही 110 मीटर लंबे और 25 मीटर चौड़े अरिहंत ने समुद्री परीक्षण के लिए जैसे ही प्रवेश किया, तो भारत का 25 साल का सपना साकार हो गया।

तेज-तर्रार तेजस
वायुसेना में औपचारिक तौर पर शामिल किए जाने से पहले अंतिम दौर के अपने परीक्षण में हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस ने आठ दिसंबर को गोवा के आकाश में 1,350 किलोमीटर प्रतिघंटे की अपनी गति को पार कर लिया।
   
सबसे बड़ा सौदा
भारत ने अगस्त में रूस के साथ अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा किया। 126 लड़ाकू विमानों के लिए किया गया यह सौदा 10 अरब डॉलर का है और यह विमान एमआईजी-35 की जगह लेंगे। बहरहाल इन विमानों की आपूर्ति में विलंब होगा, क्योंकि इनके निर्माता ने कहा कि इनका श्रृंखलाबद्ध उत्पादन 2014 से पहले शुरू नहीं हो सकेगा।

सेना के हवाले टी-90
परमाणु हमले से बचाव में सक्षम स्वदेश निर्मित मुख्य युद्धक टैंक टी-90 की पहली खेप 24 अगस्त को सेना को सौंप दी गई। इस खेप में दस टैंक शामिल हैं। प्रत्येक टैंक के निर्माण पर 14-15 करोड़ रूपए की लागत आई है। टी-90 टैंक फायर गाइडेड मिसाइल से सुसज्जित हैं। इसमें परंपरागत गोला बारूद का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

समुद्र पर नजर
मुंबई में हुए आतंकवादी हमले से सचेत हुई महाराष्ट्र सरकार ने महानगर के पुलिस बेड़े में 29 सितंबर को दो और बुलेटप्रूफ स्पीडबोट शामिल किए ताकि तटीय इलाकों में गश्त को और चुस्त दुरूस्त किया जा सके। कोयना और कावेरी नामक ये दो एसी स्पीडबोट आधुनिक प्रणाली के इंजन और जीपीएस तकनीक से लैस हैं। मुंबई आतंकी हमलों के बाद अपनी निगरानी क्षमता में इजाफा करते हुए तटरक्षक बल ने अत्याधुनिक नेविगेशन और संचार उपकरणों से लैस इंटरसेप्टर नौका को नौ अक्टूबर को तिरूवनंतपुरम के विजिनजम बंदरगाह पर अपने बेड़े में शामिल कर लिया। इंटरसेप्टर नौका सी-144 कोझिकोड जिले में बेपोर बंदरगाह में तैनात है। इसकी सीमा 500 समुद्री मील तक है।

बेड़े में आईएनएस कोच्चि
इसी साल 18 सितंबर को मुंबई में 6500 टन के आईएनएस कोच्चि का जलावतरण किया। यह प्रोजेक्ट
15-ए के तहत दूसरा युद्धपोत है। इस परियोजना के तहत तीन युद्धपोत निर्मित किए जाएंगे। सेना ने पहली बार डीआरडीओ द्वारा निर्मित एक किफायती वाहन को जुलाई के पहले सप्ताह में अपने बेड़े में शामिल किया जो परमाणु, जैविक और रासायनिक (एनबीसी) हथियारों से हमले की पहचान कर सकता है। डीआरडीओ के पांच प्रयोगशालाओं में तैयार इस वाहन का उपयोग देश के अंदर परमाणु विकिरण की पहचान करने और पर्यावरण में रासायनिक एवं जैविक कारकों की उपस्थिति का पता लगाने में किया जाएगा।

कहीं सफल, कहीं असफल   
इक्वेडोर की वायुसेना को बेचा गया एक ध्रुव हेलीकॉप्टर 28 अक्टूबर को क्वीटो में सैन्य परेड़ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और दो पायलट घायल हो गए। इस हादसे से विदेशों में भारतीय हेलीकॉप्टरों का बाजार तैयार करने के भारत के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा।

हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के लिए प्रारंभिक अभियान क्षमता (आईओसी) कांफिरगुरेशन वर्ष 2010 तक हासिल करने की तरफ बढ़ती वायु सेना ने अपने जामनगर वायु सैनिक अड्डे पर सितंबर से अक्टूबर के दौरान पांच सप्ताह तक स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमानों के एक जोड़े का बहुआयामी परीक्षण किया।

ब्रह्मोस पर कयास
प्रक्षेपास्त्रों के परीक्षण का सिलसिला भी सफलतापूर्वक साल भर जारी रहा। 20 जनवरी को 290 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाले और परमाणु हथियार ढोने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल का राजस्थान के पोखरण में परीक्षण किया। लेकिन ब्रह्मोस के सफल प्रक्षेपण का दावा करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने कहा कि अंतिम समय में प्रक्षेपास्त्र का निशाना चूक गया।

चार मार्च को डीआरडीओ ने ब्रह्मोस का राजस्थान के पोखरण में सफल परीक्षण किया। नौ मार्च को स्वदेशी बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र रक्षा (बीएमडी) शील्ड के तीन सफल परीक्षण करने के बाद डीआरडीओ ने कहा कि इस प्रणाली का पहला चरण 2011 तक विकसित किया जाएगा। 29 मार्च को ब्रह्मोस के भूमि पर मार करने वाले संस्करण का राजस्थान के रेगिस्तान में एक माह में दूसरी बार सफल प्रायोगिक परीक्षण हुआ और कहा गया कि यह सेना में शामिल करने के लिए तैयार है।

निशाने पर मिसाइल
19 मई को उड़ीसा के बालेश्वर में भारत ने परमाणु शक्ति संपन्न अग्नि दो प्रक्षेपास्त्र का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया। प्रक्षेपण केंद्र से इसकी मारक क्षमता 3,000 किमी थी। बालेश्वर से 13 दिसंबर को तट के नजदीक बंगाल की खाड़ी में मिसाइल पृथ्वी के नौसैन्य संस्करण, 350 किलोमीटर की मारक क्षमता से युक्त और परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल धनुष का सफल परीक्षण किया गया।

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