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दुनियाभर में सिंह बने किंग

नीली पगड़ी वाले मनमोहन सिंह 2009 में एक बार फिर देश के सरदार तो चुने ही गए, साथ ही जांबाज और दिलदार सिख कौम के बाशिंदों ने इस वर्ष दुनियाभर में कई क्षेत्रों में अपने हुनर की बानगी पेश की। महारानी एलिजाबेथ के सुरक्षा काफिले से लेकर अमेरिकी सेना तक में पगड़ी के तेवर दिखाई दिए। कई और मौकों पर भी सिखों की उपलब्धियां अखबारों की सुर्खियां बनीं।

महारानी की सुरक्षा में सिख सैनिक
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के सुरक्षा काफिले में पहली बार दो सिख सैनिकों को शामिल किया गया। इस साल जुलाई में सिगनालेर सिमरनजीत सिंह और लांस कारपोरल सर्वजीत सिंह को बकिंघम के रॉयल गार्ड्स में शामिल किया गया।

सिमरनजीत सिंह विल्टशायर की 21वीं सिग्नल रेजिमेंट से जुड़े हैं, जबकि सर्वजीत सिंह वॉटिशाम की तीसरी रेजिमेंट आर्मी कॉर्प्स के सैनिक हैं। गौरतलब है कि सिमरनजीत ने इस साल मई में सार्वजनिक ड्यूटी पर अपनी पगड़ी पहन कर महारानी की सुरक्षा और ताज के रत्न की हिफाजत का कार्य कर प्रथम सिख सैनिक के रूप में इतिहास रच दिया था। उनके साथ लांस कोरपोरल सिंह भी थे। इन दोनों लोगों को अपने इस नए कार्य में अपनी पगड़ी, केश और दाढ़ी रखने की इजाजत दी गई। वे लाल परिधान में नजर नहीं आएंगे।

अमेरिकी सेना में सिख
अमेरिकी प्रशासन ने 12 सितंबर को सिखों की एक पुरानी मांग को स्वीकार करते हुए उन्हें अमेरिकी सेना में भर्ती किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कैप्टन तेजदीप सिंह रतन को अमेरिकी सेना के दंतविज्ञानी के तौर पर स्वीकार किया गया है और पगड़ी पहनने और केश रखने की अनुमति दी गई।    

अमेरिका में कैलिफोर्निया राज्य की विधानसभा ने सिखों और उनकी कृपाण के धार्मिक महत्व के बारे में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को प्रशिक्षण देने के लिए सितंबर में एक महत्वपूर्ण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया है। प्रशिक्षण में अधिकारियों को खास तौर पर यह बात सिखाई जाएगी कि कृपाण लेकर चलने वाले व्यक्तियों की पहचान कैसे की जाए और उनसे किस तरह पेश आया जाए। यह एक ऐसा कदम है जिससे सिख समुदाय के बहुत से लोगों की अनावश्यक गिरफ्तारियों को रोकने में मदद मिलेगी। सिखों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले संगठन सिख कोलिएशन ने विधेयक पारित किए जाने की प्रशंसा करते हुए इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया और इसे कानून बनाने की सिफारिश की।

नहीं उतारेंगे पगड़ी
लंदन में दंगा निरोधी प्रशिक्षण के दौरान एक आला अधिकारी ने अपने मातहत सिख पुलिसकर्मी को पगड़ी उतारने के लिए कहकर अपने लिए आफत बुला ली। अधिकारी के इस आदेश का सिख पुलिसकर्मी ने विरोध किया और इसे नस्ली और धार्मिक भेदभाव बताकर मुआवजे का दावा ठोक डाला। ब्रिटेन के रोजगार न्यायाधिकरण के आदेश पर पुलिस प्रशासन ने सिख पुलिसकर्मी को 12,636 पौंड बतौर मुआवजा देने की घोषणा की। मैनचेस्टर में तीन सप्ताह की सुनवाई के बाद सिंह को अप्रत्यक्ष भेदभाव, अपमान, मनोवैज्ञानिक नुकसान, भावनाएं आहत होने तथा अन्य मामले में मुआवजा देने की घोषणा की गई।

पाठ्यक्रम में सिख पगड़ी
पश्चिमी देशों में 11 सितंबर के हमले के बाद सिखों द्वारा पहनी जाने वाली पगड़ी के बारे में फैली मान्यताओं को दूर करने संबंधी फिल्म को बरमिंघम सिटी काउंसिल ने धार्मिक शिक्षा के अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए अक्टूबर में हरी झंडी दे दी। अमेरिका में 11 सितंबर और लंदन में जुलाई 2005 में हुई गोलीबारी के बाद पगड़ी पहनने वाले कई सिखों को निशाना बनाया गया था। काउंसिल ने टर्बेनोलॉजी फिल्म को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मंजूरी दी, जिसमें बताया गया है कि गलतफहमी की वजह से यह प्रतीक कैसे आतंकवाद से जोड़ दिया गया था।

व्हाइट हाउस में मना गुरुपर्व
अमेरिका में सिखों के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि व्हाइट हाउस में 16 नवंबर को पहली बार गुरु नानक का जन्मदिन गुरुपर्व मनाया गया, जिसमें स्वर्ण मंदिर के संगीतकारों ने मोहक प्रस्तुति दी और समारोह में पूरे अमेरिका में रहने वाले विभिन्न सिख नेताओं ने भाग लिया।
   
सिर चढ़कर बोली पगड़ी
इस दौरान फ्रांस में सिख छात्रों के पगड़ी पहनने पर लगी रोक को हटा लिया गया। दरअसल जुलाई में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सिख छात्रों के पगड़ी पहनने पर लगी रोक का मामला फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के समक्ष उठाया था, इस पर सरकोजी ने मनमोहन सिंह को आश्वासन दिया कि उनके देश में सिख छात्रों के पगड़ी पहनने और धार्मिक प्रतीकों जैसे कृपाण कड़ा आदि के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है। फ्रांस में 2004 में स्कूलों में सिख छात्रों के पगड़ी पहनने पर रोक लगा दी गई थी ।

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