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2009 : क्रिकेट को मिला नया बादशाह

सबसे अमीर बोर्ड होने के दबदबे की वजह से पिछले कुछ वर्षों से विश्व क्रिकेट पर राज करने वाले भारत ने इस वर्ष मैदान पर अपनी खेल शक्ति का जोरदार प्रदर्शन करके टेस्ट और वनडे दोनों में पहली बार बादशाह बनने का गौरव हासिल किया। वहीं सचिन तेंदुलकर ने इसी साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल और 30 हजार रन पूरे किए।
     
भारत के लिए यह साल यादगार रहा जो विश्व क्रिकेट का लगभग 70 प्रतिशत राजस्व पैदा करता है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर अपनी धनशक्ति का रूतबा दिखाने के आरोप इस वर्ष भी लगे लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम ने दिखाया कि भारत क्रिकेट के मैदान का भी बादशाह है।
     
क्रिकेट का नया बादशाह
भारतीय टीम वर्ष में दो बार वनडे रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंची जबकि साल के अंत में उसने श्रीलंका को दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हराकर 2002 में शुरू की गई रैकिंग में पहली बार नंबर एक का स्थान हासिल किया। भारत को अगले 11 महीनों में हालांकि केवल दो टेस्ट मैच खेलने थे और उसकी बादशाहत खतरे में थी। यही वजह थी कि बीसीसीआई ने आनन-फानन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अगले साल दो टेस्ट मैचों की सीरीज आयोजित कर दी।

भारत ने न्यूजीलैंड को उसी की सरजमीं पर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से हराकर 2002 की हार का बदला चुकता किया। उसने हैमिल्टन टेस्ट मैच दस विकेट से जीता। गंभीर ने इस सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन किया और तीन मैच में 445 रन बनाए। जुलाई 2008 से लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाएं हाथ के इस बल्लेबाज को आईसीसी का वर्ष का टेस्ट क्रिकेटर भी चुना गया।

भारत इसके बाद हालांकि अगले दस महीने तक टेस्ट मैच नहीं खेला जिसके लिए बीसीसीआई की आलोचना भी हुई। भारतीय टीम ने श्रीलंका को कानपुर में टेस्ट में पारी और 144 रन और मुंबई में पारी और 24 रन से हराकर दुनिया की नंबर एक टीम बनने का गौरव हासिल किया। मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में 36 साल बाद यह मैच खेला गया था।

सचिन के 20 साल और दूसरे रिकॉर्ड्स
इस मैच के दूसरे दिन भारत ने एक विकेट पर 443 रन बनाकर नया रिकॉर्ड बनाया। वीरेंद्र सहवाग ने मैच में 293 रन बनाए और एक दिन में 284 रन ठोंककर भारत की तरफ से अपना पिछला रिकॉर्ड ही तोड़ा।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज सीरीज में 17 हजार रन पूरे करने वाले तेंदुलकर ने श्रीलंका के खिलाफ अहमदाबाद में पहले टेस्ट मैच में कदम रखते ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष पूरे किए। इस स्टार बल्लेबाज ने इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 30 हजार रन पूरे करने का अद्भुत रिकॉर्ड भी बनाया।

रैंकिंग का हेर-फेर
भारत ने वनडे क्रिकेट में वर्ष का शानदार आगाज किया और श्रीलंका को उसी की सरजमीं पर 4-1 से हराया। इसके बाद उसने न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज को उनकी सरजमीं पर क्रमश: 3-1 और 2-1 से मात दी। उसने श्रीलंका में कॉम्पैक कप त्रिकोणीय सीरीज जीती। इसी टूर्नामेंट के दौरान 11 सितंबर को न्यूजीलैंड पर छह विकेट से जीत पर भारत पहली बार दुनिया की नंबर एक वन डे टीम बनी। भारत की बादशाहत हालांकि एक दिन तक सीमित रही और अगले दिन श्रीलंका से हारने के कारण वह दूसरे नंबर पर खिसक गया लेकिन आईसीसी
चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबान दक्षिण अफ्रीका की टूर्नामेंट के पहले दिन ही श्रीलंका के हाथों हार से धोनी की टीम फिर से नंबर एक पर काबिज हो गई। भारत इस बार भी ज्यादा देर तक यह पोजीशन बरकरार नहीं रख पाया और 26 सितंबर को पाकिस्तान के हाथों हार से चोटी की रैंकिंग से खिसक गया।

इसके बाद भारत को ऑस्ट्रेलिया के हाथों घरेलू सीरीज में 2-4 से हार का सामना करना पड़ा, जिससे उसकी रेटिंग और गिर गई। भारतीय टीम अब भी दूसरे नंबर पर काबिज है और शीर्ष पर स्थित ऑस्ट्रेलिया और उसके बीच सात रेटिंग अंक का अंतर है।

नहीं बचा पाए टी-20 खिताब
भारतीय टीम ने वनडे क्रिकेट में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा लेकिन इंग्लैंड में खेले गए टी-20 विश्व कप में वह अपना खिताब बचाए रखने में नाकाम रही और सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंच पाई।

धोनी-गंभीर नंबर-1
व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात की जाए तो कप्तान धोनी इस साल जनवरी में वेस्टइंडीज के क्रिस गेल को हटाकर दुनिया के नंबर एक वनडे बल्लेबाज बने। वह सबसे पहले अप्रैल 2006 में एक सप्ताह और अगस्त 2008 में कुछ समय के लिए इस नंबर पर रहे लेकिन इस साल ज्यादा समय वही दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बने रहे।

जबकि टेस्ट मैचों में गौतम गंभीर को यही पोजीशन मिली। साल भर टेस्ट की नंबर-1 पोजिशन पर उन्हीं का दबदबा रहा। गंभीर ने टेस्ट और वनडे दोनों में अपने बल्ले की छाप छोड़ी और दिल्ली के उनके साथी सहवाग ने उन्हें राहुल द्रविड़ के बाद भारत की दूसरी दीवार और सुनील गावस्कर के बाद देश का सर्वश्रेष्ठ सलामी बल्लेबाज करार दिया। गंभीर ने इस साल पांच टेस्ट मैच में 727 रन बनाए जबकि द्रविड़ ने छह मैच में 747 रन ठोंके। उनके अलावा सहवाग (631), तेंदुलकर (541) और वीवीएस लक्ष्मण (471) ने भी अपनी भूमिका से पूरा न्याय किया।

अफ्रीका में आईपीएल
इंडियन प्रीमियर लीग को लेकर चली उठापटक के कारण भी वर्ष 2009 क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में बना रहेगा। लोकसभा चुनावों के कारण जहां आईपीएल का दूसरा सत्र दक्षिण-अफ्रीका में आयोजित किया गया, वहीं पाकिस्तानी खिलाड़ियों के इससे बाहर होने, क्रिकेटरों की इस धनाढ़य लीग में खेलने की बेताबी और इससे विश्व क्रिकेट के बदलते मायनों के लिए भी यह वर्ष याद किया जाएगा।

देश में लोकसभा चुनावों के कारण केंद्र मैचों के लिए सुरक्षा मुहैया कराने को तैयार नहीं हुआ, जिससे इस लीग का दूसरा टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया। पहले सत्र में सबसे निचली पायदान पर रही हैदराबाद की डेक्कन चार्जर्स ने रॉयल चैलेंजर्स बैंग्लौर को हराकर खिताब जीता। इन दोनों के अलावा दिल्ली डेयरडेविल्स ने पहली बार आयोजित चैंपियंस लीग में शिरकत की जिसे ऑस्ट्रेलियाई न्यू साउथ वेल्स की टीम ने जीता।

मुंबई बना रणजी चैंपियन
बीसीसीआई ने इसी वर्ष इंडियन क्रिकेट लीग से जुड़े खिलाड़ियों को अधिकृत क्रिकेट में जुड़ने का मौका दिया, जिससे कई नए-पुराने क्रिकेटरों की अपनी रणजी टीमों में वापसी हुई। मुंबई रणजी चैंपियन बना लेकिन इस साल दिलीप ट्रॉफी आयोजित नहीं की गई। लंबे समय से मुंबई की तरफ से खेलने वाले अमोल मजूमदार ने इस वर्ष असम की तरफ से खेलते हुए रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने अमरजीत केपी का रिकॉर्ड तोड़ा।

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