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नाकाम रहे भारतीय एथलीट

भारतीय एथलीट वर्ष 2009 भूलने की कोशिश करेंगे, क्योंकि उन्हें विश्व स्तर पर असफलताओं के साथ उपमहाद्वीप में मिली थोड़ी बहुत कामयाबी के बाद साल के अंत में डोपिंग से शर्मसार होना पड़ा। भारतीय एथलीटों को एशियाई चैंपियनशिप और तीन ग्रां प्री प्रतियोगिताओं में थोड़ी सफलता मिली, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में कोई कामयाबी नहीं हासिल कर पाए।

एशियाई ग्रां प्री में तीसरा पायदान
भारत ने एशियाई ग्रां प्री के तीन चरणों में पांच स्वर्ण, 11 रजत और 15 कांस्य समेत कुल 31 पदक अपने नाम किए। इसमें सुरेंद्र कुमार ने 3,000 मी. में दो और 5,000 मी. में तीन स्वर्ण पदक जीते जबकि उदीयमान शॉटपुट एथलीट ओम प्रकाश ने भी एक पीला तमगा और दो रजत हासिल किए। भारत नवंबर में चीन में हुई एशियाई चैंपियनशिप में मेजबान और जापान के बाद तीसरे स्थान पर रहा और उसकी झोली में 12 पदक रहे, जिसमें ओम प्रकाश सिंह ने स्वर्ण जीता।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिसड्डी
भारतीय एथलीटों ने हालांकि वैश्विक स्तर पर निराशाजनक प्रदर्शन किया। बीजिंग ओलंपिक में मिली निराशा के बाद लंबी कूद की एथलीट अंजू बाबी जॉर्ज टखने की चोट के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर सकीं।

बर्लिन में अगस्त में हुई विश्व चैंपियनशिप में जिन छह एथलीटों ने शिरकत की, वे अपनी स्पर्धाओं में अंतिम स्थान पर रहे। इससे पहले इन सभी ने 20 एथलीटों के साथ लंदन में नेवहाम स्पोर्ट्स अकादमी में ब्रिटिश ओलंपिक स्वर्ण पदकधारी टेसा सैंडरसन के अंतर्गत एक महीने का ट्रेनिंग कम टूर्नामेंट के लिए इंग्लैंड का दौरा किया था।

डिस्कस थ्रो एथलीट सीमा अंतिल और कृष्णा पूनिया फाइनल राउंड में पहुंचने में असफल रहीं। जोसफ अब्राहम (400 मीटर बाधा दौड़) भी शुरूआती राउंड में क्वालीफाई नहीं कर पाए। सुरेंद्र कुकार सिंह 19वें और सुश्मिता सिंघा राय (हेप्टाथलन) में 26 एथलीटों में अंतिम स्थान पर रहीं। बाबूभाई पनोचा (20 किमी पैदल चाल) ने 1:23:06 के समय से राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, लेकिन उनका प्रयास उन्हें 20वें स्थान पर ही पहुंचा सका।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने 15 लाख रूपए की ईनामी राशि की पांच इंडियन ग्रां प्री स्पर्धाओं का आयोजन किया। स्प्रिंटर अब्दुल नजीब कुरैशी और मंजुनाथ ज्योति ने पुरूष और महिला 100 मी. में तीन स्वर्ण हासिल किए जबकि कष्णा पूनिया महिला शॉट में लगभग सभी में जीत दर्ज करने में सफल रही। एएआई ने कैलेंडर में शामिल राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया, जिसके लिए उसने तकनीकी कारणों को जिम्मेदार ठहराया।

महिला और पुरूषों का सीनियर राष्ट्रीय फेडरेशन कप और नेशनल थ्रो तथा नेशनल एंडयूरेंस स्पर्धाओं का आयोजन भी नहीं किया गया।

खेल अधिकारी बने सुर्खियां
इसी वर्ष एएफआई अध्यक्ष सरदार उमराव सिंह का निधन हो गया। वह एशिया की एथलेटिक्स संघ (एएए) के संस्थापक और अंतरराष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ के परिषद सदस्य थे। भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी नवंबर में सालाना कांग्रेस में एशियाई संस्था एएए के प्रमुख बने।

डोपिंग ने किया बदनाम
लेकिन वर्ष के अंत में एथलेटिक्स कुश्ती के साथ बराबरी करते हुए भारोत्तोलकों के बाद डोपिंग में दूसरे नंबर पर रहा। पटियाला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में ट्रेनिंग कर रहे चार एथलीट राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) की जांच में प्रतिबंधित पदार्थ के इस्तेमाल में दोषी पाए गए। ये 2010 राष्ट्रीय खेलों के कोर ग्रुप के सदस्य थे।

इन चार में दो हैमर थ्रो एथलीट मधु कुमार और सुकन्या मिश्रा जबकि एक जेवलिन थ्रो एथलीट ओम नारायण राष्ट्रीय चैंपियन थे। चौथा हैमर थ्रो एथलीट शंकर पूनिया था। एएआई ने इस बारे में कुछ नहीं बताया और इसे कम करने की तरफ कदम उठाने की भी जहमत नहीं उठाई। उसे यहां होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में कम से कम 10 पदक और चीन में अगले साल होने वाले एशियाई खेलों में दर्जन भर स्वर्ण पदकों की उम्मीद है।

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