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20 साल से अंतरराष्टीय क्रिकेट में 'जय'सूर्या

20 साल से अंतरराष्टीय क्रिकेट में 'जय'सूर्या

श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज और वनडे क्रिकेट के पहले पंद्रह ओवर में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के जनक सनथ जयसूर्या ने भारत के खिलाफ रविवार को फिरोजशाह कोटला में पांचवें और अंतिम वनडे मैच में मैदान पर उतरते ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल पूरे किये।

जयसूर्या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो दशक पूरे करने वाले दुनिया के 19वें और श्रीलंका के पहले क्रिकेटर हैं। बायें हाथ का यह बल्लेबाज हालांकि इसे यादगार नहीं बना पाया और श्रीलंका जब संकट में था तब केवल 31 रन बनाकर हरभजन सिंह की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गया।

जयसूर्या से पहले भारतीय स्टार सचिन तेंदुलकर ने नवंबर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल पूरे किये थे जो श्रीलंकाई बल्लेबाज के पसंदीदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। जयसूर्या ने हाल में एक साक्षात्कार में भी इसका जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मुंबई इंडियन्स की तरफ से उनके साथ खेलने का अनुभव अविश्वसनीय रहा। उनकी हमेशा मेरे लिये यही सलाह रही कि अपना खेल खेलो और उसका पूरा लुत्फ उठाओ।

कोलंबो से लगभग डेढ सौ किलोमीटर दूर स्थित एक छोटे से गांव मतारा में 30 जून 1969 को जन्में जयसूर्या ने अपना पहला मैच 26 दिसंबर 1989 को आस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में खेला था। यह वही मैच था जिसमें आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने भी वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था लेकिन जयसूर्या जहां अब भी खेल रहे हैं वहीं टेलर ने लगभग दस साल पहले क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

मतारा से रोज कोलंबो आकर अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत करने वाले जयसूर्या ने अंडर-19 टीम से राष्ट्रीय टीम में जगह बनायी लेकिन शुरू में वह पांचवें, छठे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आते थे और महज एक आलराउंडर के तौर पर टीम में रहे।

श्रीलंकाई क्रिकेट के दो स्तंभ अर्जुन रणतुंगा और अरविंद डिसिल्वा ने 1995 में जयसूर्या से वन डे में पारी का आगाज कराने का फैसला किया जिसके बाद तो इस बल्लेबाज का कैरियर ही बदल गया। इससे पहले तक वनडे मैचों में शुरुआती पंद्रह ओवर में केवल गेंद की चमक उतारने पर ध्यान दिया जाता वहीं जयसूर्या ने पावरप्ले के इन ओवरों का उपयोग तेजी से रन बनाने के लिए किया जिससे सीमित ओवरों के मैचों की तस्वीर बदल गयी और 300 से अधिक रन बनना आम हो गया।

श्रीलंका ने 1996 में विश्व कप जीता जिसमें जयसूर्या की भूमिका अहम रही। मतारा के गरीब परिवार में जन्मा यह क्रिकेटर बाद में टीम का कप्तान भी बना और उन्हें गेंदबाजों का कत्लेआम करने वाला बल्लेबाज कहा जाने लगा लेकिन पिछले कुछ समय से लचर फार्म के कारण उन्हें अपना सलामी बल्लेबाज का दर्जा गंवाना पड़ा और भारत के खिलाफ वर्तमान सीरीज में वह मध्यक्रम के लिए बल्लेबाजी के लिए उतरे।

जयसूर्या टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन वनडे में वह अभी कुछ और महीनों तक टीम में बने रहना चाहते हैं। चालीस बसंत देख चुके बायें हाथ के इस बल्लेबाज ने 110 टेस्ट मैच में 40.07 की औसत से 6973 रन बनाये हैं जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 340 रन है। इसके अलावा उन्होंने 444 वनडे में 32.43 की औसत से 13428 रन बनाये हैं। इसके अलावा उनके नाम पर 322 विकेट भी दर्ज हैं। वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में छठे नंबर पर हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 577 मैच खेले हैं। उनसे अधिक मैच केवल तेंदुलकर (603) के नाम पर दर्ज हैं।

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