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सायना, ज्वाला, दीजू के लिए यादगार साल

भारतीय बैडमिंटन के लिए 2009 यादगार साल रहा, जिसमें सायना नेहवाल ने चीनी खिलाड़ियों का दबदबा कम किया तो मिश्रित युगल में ज्वाला गुट्टा और वी दीजू शीर्ष दस में पहुंचे।

सायना की शान
पिछले साल चीनी ताइपै खिताब जीतने वाली सायना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भारतीय बैडमिंटन की सबसे बड़ी स्टार हैं। हैदराबाद की यह खिलाड़ी सुपर सीरिज खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बनी जब उसने जून में इंडोनेशिया ओपन जीता था। सायना को इस साल अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया जबकि उनके गुरु पुलेला गोपीचंद द्रोणाचार्य पुरस्कार के हकदार बने।

ओलंपिक क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सायना ने इस साल भी जाइंट किलर वाले तेवर बरकरार रखे। सायना मलेशिया सुपर सीरिज, स्विस ओपन और इंडियन ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची। उसके उम्दा प्रदर्शन की वजह से ही भारत मई में सुदीरमन कप में ग्रुप दो तक पहुंच सका। जून में सिंगापुर ओपन में वह अंतिम आठ में वांग लिन से हार गई, लेकिन इंडोनेशिया में इस चीनी प्रतिद्वंद्वी को हराकर उसने पहला सुपर सीरिज खिताब जीता।
   
सायना मलेशिया ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंची। भारत में पहली बार हुई विश्व चैंपियनशिप में भी वह अंतिम आठ में पहुंची जहां उसे वांग लिन ने हराया। भारतीय अधिकारियों और विश्व बैडमिंटन महासंघ के बीच गलतफहमी की वजह से सायना चीन मास्टर्स में भाग लेने से वंचित रह गई। लेकिन डेनमार्क और फ्रांस में हुई सुपर सीरिज के क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर वह अक्टूबर में विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर पहुंची। वर्ष के आखिर में उसने विश्व सुपर सीरिज मास्टर्स के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया।


ज्वाला-दीजू का जलवा
सायना ने जहां एकल वर्ग में परचम लहराया, वहीं मिश्रित युगल में ज्वाला और दीजू छाये रहे। पुरूष जोड़ी रूपेश कुमार और सनावे थामस ने जुलाई में न्यूजीलैंड ग्रां प्री और अक्टूबर में बिटबर्गर ओपन जीता। वे ऑस्ट्रेलियाई ओपन ग्रां प्री के फाइनल तक पहुंचे।

चेतन आनंद और अरविंद बट इस साल कोई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं जीत सके। वहीं पी कश्यप स्पेनिश ओपन में उपविजेता रहे। ज्वाला और दीजू विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी जिन्होंने अगस्त में चीनी ताइपै ग्रां प्री गोल्ड में जीत दर्ज करके शीर्ष दस में जगह बना ली। इस साल अरविंद बट ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में खिताब नहीं जीत पाने का कलंक धोया और इंदौर में हुए फाइनल मुकाबले में पी कश्यप को हराकर राष्ट्रीय चैंपियन बने।

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