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विजेंद्र बने नंबर-1, सुरंजय बने गोल्डन ब्वॉय

ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के बाद इस साल भी भारतीय मुक्केबाजों ने कई मिथक तोड़ते हुए नई बुलंदियों को छुआ, जिसमें विजेंदर सिंह का सितारा एक बार भी पूरी शिद्दत से चमका।

नंबर-1 बने विजेंद्र
भारत के लिए विश्व चैंपियनशिप का पहला पदक जीतने की बात हो या दुनिया का नंबर एक मिडिलवेट मुक्केबाज कहलाने का गौरव, ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर लगातार दूसरे साल भारतीय मुक्केबाजी के सबसे बड़े सितारे रहे। खेल प्रबंधन कंपनी परसेप्ट के साथ लाखों डॉलर के करार ने उन्हें क्रिकेट से इतर देश के सबसे बड़े खेल सितारों की जमात में ला खड़ा किया।

मैरीकॉम और विजेंद्र को खेल रत्न
विजेंदर और महिला मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा गया, जो भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में पहली बार हुआ यानी पहले किसी मुक्केबाज को यह सम्मान नहीं मिला था। जूरी ने विजेंदर और मैरीकॉम को कुश्ती में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता सुशील कुमार के साथ यह पुरस्कार दिया।

गोल्डन ब्वॉय बने सुरंजय, छाया रहा भारत
विजेंदर ने जहां हर टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता, वहीं मणिपुर के एक छोटे से कस्बे से निकले सुरंजय सिंह भारतीय मुक्केबाजी के गोल्डन ब्वॉय साबित हुए। इस फ्लायवेट मुक्केबाज ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

पिछले साल के सुनहरे प्रदर्शन की कहानी दोहराते हुए भारतीयों ने साल की शुरूआत ही जीत के साथ की। चेक गणराज्य में मई में खेले गए यूरोपीय ग्रां प्री में सुरंजय ने स्वर्ण पदक जीता और 40 साल में पहली बार इस स्पर्धा में किसी भारतीय मुक्केबाज को पीला तमगा मिला।

ओलंपिक के बाद पहला टूर्नामेंट खेल रहे विजेंद्र को दो अन्य के साथ कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। जून में चीन में हुई एशियाई चैंपियनशिप में सुरंजय ने फिर देश के लिए एकमात्र स्वर्ण पदक जीता। विजेंदर को फिर कांस्य से ही संतोष करना पड़ा। भारत ने 27 बरस में इस टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक हासिल किए।

विजेंद्र ने मिलान में विश्व चैंपियनशिप में एक और कांस्य जीतकर नया इतिहास रचा। ओलंपिक के बाद सबसे बड़े मुक्केबाजी टूर्नामेंट में भारत का यह पहला पदक था।

कलाई की चोट के कारण वह प्रेसिडेंट कप में हिस्सा नहीं ले सके लेकिन सुरंजय ने इसमें भी स्वर्ण पदक जीतकर टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज होने का श्रेय हासिल किया।

पिछले साल ओलंपिक में प्रभावी प्रदर्शन करने वाले अखिल कुमार और जितेंदर कुमार इस सत्र में उस कामयाबी को नहीं दोहरा सके। दोनों इस साल फिटनेस समस्याओं से जूझते रहे। अखिल फीदर वेट (57 किलो) में चले गए तो जितेंदर बेंटम वेट (54 किलो) में पहुंच गए। जितेंदर ने एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता लेकिन इसके अलावा बाकी टूर्नामेंटों में दोनों का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा।

वर्ल्ड बॉक्सिंग सीरीज में भारत फ्रेंचाइजी
रिंग के बाहर अगले साल शुरू होने वाली बहुचर्चित वर्ल्ड बॉक्सिंग सीरीज में भारत को फ्रेंचाइजी का दर्जा हासिल हुआ। वह एशिया की चार फ्रेंचाइजी टीमों में से होगा और वीडियोकान ने कई कॉरपोरेट समूहों को पछाड़कर फ्रेंचाइजी हासिल की है।

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