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राष्ट्रमंडल खेलों से पहले भारतीय भारोत्तोलन पर डोपिंग का डंक

कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 सिडनी ओलंपिक में कांस्य जीतकर भारत को भारोत्तोलन में शिखर तक पहुंचाया था, लेकिन उसके बाद लगातार गिरते प्रदर्शन और डोपिंग के डंक के कारण भारतीय भारोत्तोलन इस कदर रसातल में चला गया कि अपनी मेजबानी में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में उसकी भागीदारी ही अनिश्चितता के घेरे में आ गई है।

सितंबर में पुणे में टूर्नामेंट के बाहर कराए गए वाडा परीक्षण में छह भारोत्तोलक दोषी पाए गए, जिससे दो बार प्रतिबंधित हो चुके राष्ट्रीय महासंघ पर एक और प्रतिबंध के बादल मंडराने लगे हैं। अगर ऐसा होता है तो देश को फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में शर्मसार होना पड़ेगा।

खेल मंत्री एमएस गिल ने भारतीय ओलंपिक संघ को आड़े हाथों लेते हुए भारोत्तोलन महासंघ से डोपिंग स्कैंडल के बाद सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने तक को कहा और इसके कारणों की विस्तृत जानकारी भी मांगी क्योंकि डोप स्कैंडल से भारतीय भारोत्तोलकों के राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने पर सवालिया निशान लग गए हैं। उन्होंने महासंघ को भारोत्तोलन को डोपिंग मुक्त करने के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए कहा था।

इसके बाद भारतीय भारोत्तोलक महासंघ की पूरी कार्यकारी समिति ने खेल मंत्री और आईओए के दबाव में डोप मामलों के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। अब महासंघ की नई समिति गठित होने के लिए चुनाव होने हैं, लेकिन आईओए ने साफ कर दिया कि इसमें पुरानी समिति के सदस्य शामिल नहीं हो सकेंगे।

आईओए हालांकि उम्मीद लगाए है कि देश प्रतिबंध से बच जाएगा, लेकिन अब फैसला अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ के हाथों में है, जो प्रतिबंध की समय सीमा का निर्धारण करेगा। उसने हालांकि व्यक्तिगत मामले के परिणाम आने तक फैसला स्थगित कर दिया है।
   
भारत पर 2004 और 2006 में प्रतिबंध लग चुका है जबकि महासंघ एक बार पहले भी काफी बड़ी राशि का जुर्माना भर चुका है। एक कैलेंडर वर्ष में तीन या चार भारोत्तोलकों के डोपिंग में दोषी पाए जाने पर चार साल के प्रतिबंध और जुर्माने का प्रावधान है। अगर ऐसा होता है तो भारत को तीन से 14 अक्टूबर को होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर बैठना पड़ सकता है।

आईओए अध्यक्ष ने डोपिंग स्कैंडल के बाद तथ्य की जांच के लिए ब्रिगेडियर केपी सिंह देव की अगुवाई वाली समिति का गठन किया, जो अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। आईओए और खेल मंत्री के सख्त रवैये के बाद नई समिति गठित होने की कवायद शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय महासंघ नरम रूख अपना सकता है। अगर भारत पर एक साल का प्रतिबंध लगता है तो टीम राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले सकती है क्योंकि यह प्रतिबंध 10 सितंबर से ही शुरू होगा और अगले साल इसी तारीख को समाप्त होगा, जबकि राष्ट्रमंडल खेल तीन अक्टूबर से शुरू होंगे।
   
राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप के लिए चल रहे ट्रेनिंग शिविर में पुरूष भारोत्तोलक हरभजन सिंह (94 किग्रा) और राजेश कुमार (94 किग्रा) तथा महिला भारोत्तोलक विजया देवी, सीपाना यामिनी (58 किग्रा), 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली शैलजा पुजारी (75 किग्रा) और 2006 मेलबर्न खेलों में रजत पदक जीत चुके पुरूष भारोत्तोलक विकी बत्ता (56 किग्रा) पॉजीटिव पाए गए। पुजारी 2006 में टूर्नामेंट के बाहर हुए टेस्ट में और बत्ता 2007 राष्ट्रीय खेलों के दौरान डोपिंग में पकड़े गए थे। इनमें से केवल हरभजन और बत्ता ने बी नमूने के लिए अपील की है।

महासंघ ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के कारण कोरिया में नवंबर में हुई विश्व चैंपियनशिप से भी टीम को नहीं भेजा था और दिसंबर में एशियाई जूनियर प्रतियोगिता की मेजबानी से भी इंकार कर दिया। महासंघ ने कहा था कि मौजूदा हालात जूनियर टूर्नामेंट के आयोजन के लिए मुफीद नहीं हैं क्योंकि सरकार हमें इस समय कोई सहयोग नहीं दे रही और प्रतिबंध के साये में प्रायोजकों का मिलना भी कठिन है।

इससे पहले भारत ने 18 से 23 अक्टूबर को मलेशिया के पेनांग में हुई राष्ट्रमंडल सीनियर और जूनियर भारोत्तोलन चैंपियनशिप में 17 स्वर्ण, नौ रजत और एक कांस्य से कुल 27 पदक अपने नाम किए। इनमें से 12 पदक सीनियरों ने जीते। अनुभवी गीता रानी ने सीनियर महिला 75 किग्रा में और ननसिता देवी ने 69 किग्रा में स्वर्ण पदक जबकि संदीप कुमार ने पुरूष सीनियर 105 किग्रा वर्ग में रजत पदक हासिल किया। जूनियर वर्ग में रीना (69 किग्रा) और प्रेमिला देवी (75 किग्रा) ने स्वर्ण पदक जीता।

पिछले साल बीजिंग ओलंपिक से पहले मणिपुरी मोनिका देवी को भी अंतिम समय में रोक दिया गया था और फिर उन्हें मार्च में बी नमूने में पॉजीटिव पाया गया, जिससे उन पर दो साल का प्रतिबंध लगा। मगाद सलामा ने भी पिछले साल सीनियर भारोत्तोलकों के डोपिंग में लिप्त होने के साथ वाडा परीक्षण से बचने की बात कहते हुए राष्ट्रीय कोच के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने महासंघ पर भारोत्तोलकों का समर्थन करने का आरोप भी लगाया था।

जून में महासंघ ने लखनऊ में अपने एक कोच और अंतरराष्ट्रीय रैफरी जीपी शर्मा पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि वह एथलीटों को प्रतिबंधित दवाएं इस्तेमाल करने में अहम भूमिका निभा रहे थे। महासंघ ने जुलाई में शिकायत की थी कि उनके पास अभ्यास के लिए जरूरी संख्या में बारबेल नहीं हैं। बाद में उन्होंने धमकी दी थी अगर बारबेल मुहैया नहीं कराई गई तो राष्ट्रमंडल खेलों के लिए लगा शिविर बंद कर दिया जाएगा।

हालांकि महासंघ पर डोप टेस्ट के लिए 15 भारोत्तोलकों से 4800 रूपये की राशि लेने का भी आरोप लगा, लेकिन उसने कहा कि अगर नाडा कोई पैसा नहीं लेती है तो यह राशि उन्हें वापस कर दी जाएगी।
   
वहीं मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक जीतने वाली 40 वर्षीय कुंजरानी देवी ने साल के शुरू में वापसी की घोषणा की और 2010 में पदक बरकरार रखने की इच्छा व्यक्त की। लेकिन उन्हें राष्ट्रमंडल के लिए चुनी गई टीम से बाहर रखा गया।

मार्च में हंगरी के कोच इमरे सुगा को भारतीय टीम का प्रमुख कोच बनाया गया। मई में टीम कजाखस्तान में हुई एशियाई सीनियर भारोत्तोलन चैंपियनशिप में एक भी पदक नहीं जीता, इसमें महिला टीम चौथे जबकि पुरूष टीम पांचवें स्थान पर रही।

जून में रोमानिया के बुकारेस्ट में विश्व जूनियर भारोत्तोलन चैंपियनशिप में पश्चिम बंगाल के सुखेन डे (56 किग्रा) कांस्य पदक जीतकर विश्व स्तर की किसी प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले पुरूष भारतीय बने। इसमें भारत के 16 भारोत्तोलकों ने भाग लिया था।

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  • Web Title:भारतीय भारोत्तोलन पर डोपिंग का साया