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रुचिका की लड़ाई लड़ने आगे आया ब्लॉग जगत

रुचिका की लड़ाई लड़ने आगे आया ब्लॉग जगत

''मैं रुचिका हूं, आज मैं आपके बीच होती तो 33 साल की होती, शायद अपना घर बसा चुकी होती लेकिन मुझे इस दुनिया को छोड़े 16 साल हो चुके हैं। मेरे पापा और भाई जिंदा तो हैं लेकिन गम का जो पहाड़ उनके सीने में दफन है वो किसी भी इंसान को जीती-जागती लाश बना देने के लिए काफी है।''

बहुचर्चित रुचिका गिरहोत्रा मामले में न्याय के लिए पीड़ित पक्ष से जुड़े तमाम मुद्दों से परिचित कराती ऐसी ही कई टिप्पणियों से इन दिनों ब्लॉग जगत भरा पड़ा है। 'देशनामा' ब्लॉग की यह टिप्पणी हमें रुचिका मामले से परिचित करा रही है। उस लड़की से, जिसने तथाकथित रूप से हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर के र्दुव्‍यवहार से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।

उल्लेखनीय है कि 12 अगस्त 1990 को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ र्दुव्‍यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बीते सोमवार को इस मामले में राठौर को केवल छह महीने की सजा सुनाई और उस पर 1000 रुपये जुर्माना भी लगाया था लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया।

'मोहल्ला लाइव' की टिप्पणी है, ''सवाल यह उठ रहा है कि रुचिका को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाला अगर राठौर नहीं तो और कौन था? रुचिका के भाई को नंगा करके पिटवाने वाले राठौर को क्या इतनी ही सजा मिलनी चाहिए? क्या हमें इसलिए चुप हो जाना चाहिए कि रुचिका हमारी बेटी नहीं है!''

'जनतंत्र' की टिप्पणी है, ''टीवी चैनलों पर चण्डीगढ़ की विशेष अदालत के बाहर राठौर को हंसते, खिलखिलाते देखा तो लगा सरकार ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी को किसी बडे़ सम्मान से नवाजा हो।''

ब्लॉग जगत में रुचिका मामले को फिर से खोलने के लिए भी मांग हो रही है। 'अनुरोध' ने टिप्पणी की है कि अदालत को रुचिका मामले को फिर से खोलना चाहिए ताकि राठौर को अधिक से अधिक सजा मिल सके। ब्लॉग ने टिप्पणी के जरिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से अपील की है कि वह रुचिका मामले को फिर से खोले और राठौर को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सजा सुनाए।

रुचिका मामले से संबंधित ऐसी कई टिप्पणियां इन दिनों ब्लॉग जगत में पढ़ी जा सकती है, इनमें मामले से संबंधित सभी पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। 'देशनामा' ने दिवंगत रुचिका के जरिए मार्मिक टिप्पणी की है, ''याद रखिए जब तक मेरा गुनहगार अपने अंजाम तक नहीं पहुंचेगा मेरी रूह को चैन नहीं मिलेगा।''

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