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पोस्टर चिपकाने से ‘पोस्टर ब्वाय’ तक

नितिन गडकरी दबते नहीं हैं। झुकते नहीं है। विनम्रता उनका स्वभाव है और आक्रामकता उनकी शैली। भारतीय जनता पार्टी के अब तक के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष हैं वे। चारों तरफ वरिष्ठों से घिरे हैं। दबाव में हैं, लेकिन आत्मविश्वास से भरे। उनकी सियासी यात्रा में दीवारों में पोस्टर चिपकाना और साइकिल पर प्रेस नोट बांटना शामिल है। इसीलिये उन्होंने भाजपा की कमान संभालते हुए अपने मंसूबे साफ करते हुए गैर जमीन नेताओं को ललकारते हुए कह दिया कि जो अपने गांव-मोहल्ले को नहीं संभाल सकता वह देश को क्या संभालेगा। बुजुर्ग गैर जमीनी दिल्ली फोर के नेताओं के लिये उनका संदेश साफ है।

नितिन असल में प्रबंधन के आदमी हैं। बचपन से अब तक वह प्रबंधन करते रहे हैं। उनके गुरू भाऊ काणे बताते हैं कि नितिन खेलते नहीं थे लेकिन खो-खो टीम के खिलाड़ियों के कपड़े संभालते थे। टीम के प्रबंधन में मदद करते थे। बेशक वे बचपन में नहीं खेले, पर अब राजनीति में उनको हर खेल को खेलना पड़ेगा। महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रहते और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहते राजनीति के प्रादेशिक खेल का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं। अब वे टेस्ट टीम के कप्तान हैं, उन्हें लगातार हार से हलकान भाजपा टीम को जीत के लिये तैयार करने की चुनौती का सामना करना है।

27 मई 1957 में नागपुर के महल इलाके में जन्मे नितिन ने शुरुआती पढ़ाई दादासाहेब धनवते विद्यालय से की है। इसी विद्यालय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार भी पढ़े हैं। इसके बाद की शिक्षा उनकी शिक्षा नागपुर विश्वविद्यालय से हुई। एमकाम, एलएलबी और डीएलएम किया। यही विद्यार्थी परिषद के बैनर के तले उन्होंने 1976 में छात्र राजनीति में कदम रखा। परिषद से जुड़ने के बाद संघ परिवार के स्वयंसेवक बने। बावजूद इसके संघ परिवार से प्रारंभ से जुड़े प्रमोद महाजन से ज्यादा वे संघ परिवार के करीबी बन गये।

महाजन की पांच सितारा राजनीतिक संस्कृति संघ परिवार को पसंद नहीं आई और नितिन विचारधारा को लेकर चट्टान की तरह महाजन के सामने खड़े हो गये। महाजन के विरोध के बावजूद वे महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष बनाये गये। 1990 में उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और विधान परिषद के सदस्य बने और अब तक हैं। भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए उन्होंने मुबंई-पुणे हाइवे बनवाया। इस हाइवे से उनके विजन की एक महत्वपूर्ण दास्तां जुड़ी है।

हाईवे निर्माण के लिये धीरूभाई अंबानी की कंपनी ने 3600 करोड़ का लोएस्ट टेंडर भरा, लेकिन उन्होंने महाजन के दबाव के बाद भी यह टेंडर उन्हें नहीं दिया और कहा कि मैं इस हाईवे को 1600 करोड़ में बना कर दिखाऊंगा। और उन्होंने वैसा ही कर दिखाया। बाद में धीरू भाई ने उन्हें शाबासी दी और अपने अस्पताल के उद्घाटन में महाजन की जगह नितिन को बुलाया। जो कहा है दिखाया वाली शैली है नितिन की। वे अपने व्यापार में भी ऐसी ही आक्रामकता रखते हैं और अपने दम पर वे पांच सौ करोड़ रुपये की विभिन्न कंपनियों के मालिक हैं। राजनीति को वे पेशा नहीं मानते हैं। कहते हैं कि वे खाली हाथ दिल्ली आये हैं और कुछ भी ले जाने का इरादा नहीं है। वे घर फूंकने वाले लोगों को साथ ले कर चलने वाले हैं। शुभकामनाएं।

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