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संघ के डंडे से अकलियतों को डरा रही है सरकार

राष्ट्रीय जनता दल ने आरोप लगाया है कि नीतीश सरकार संघ के डंडे से अकलियतों को डराना चाहती है। राजद कार्यकर्ता अपना खून बहा देंगे लेकिन बिहार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कार्यस्थली नहीं बनने देगा। उनकी पार्टी इस मसले को लेकर जनता के बीच जाएगी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के धर्म निरपेक्ष चेहरे से पर्दा हटायेगी।

प्रधानमहासचिव रामकृपाल यादव, प्रवक्ता शकील अहमद खान के अलावा पार्टी नेता तनवीर हसन, रामचन्द्र पूर्वे और रामवचन राय ने कहा कि जब सरकार के उप मुखिया के साथ कई मंत्री गणवेश धारण कर मोहन भागवत के कार्यक्रम में शिरकत करते हैं तो अब बचा ही क्या है।

शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आरएसएस एक सांप्रदायिक संगठन है और सरकार के सहयोग से वह राजधानी में न सिर्फ कार्यक्रम कर रहा है बल्कि मंत्री तक उसकी व्यवस्था में जुटे हैं तो फिर मुख्यमंत्री खुद को धर्मनिरपेक्ष कैसे बता सकते हैं।

उन्हें यह बताना चाहिए कि वे बाबरी विध्वंस के मुजरिम को सहयोग कर राज्य को कहां ले जाना चाहते हैं? कुछ वर्ष पहले भागलपुर में संघ की चहलकदमी बढ़ी थी तो वहां दंगा हुआ। 1989 के जमशेदपुर के दंगे की जांच करने वाली कमेटी की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि संघ के कारण वहां दंगा।

अब एक बार फिर संघ ने बिहार को अपने एजेन्डे पर ले लिया है। हमें आशंका है कि यह संगठन 15 वर्षो की मेहनत से राजद द्वारा बनाये गये सांप्रदायिक सौहार्द को फिर से तोड़ने में जुटा है।  वह जातीय तनाव भी पैदा करना चाहता है। जातीय प्रमुखों से बात करने का मतलब कुछ ऐसा ही है। सरकार सकी गोद मेंहै लिहाजा वह भयभीत भी है। लेकिन उसे नहीं पता कि सूबे की जनता उसे कभी मौका नहीं देगी।  

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