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उदार चेहरा दिखा संघ का

तीर तो बस एक ही था नागरिक अभिनंदन का, लेकिन निशाने कई कई पर साधे गये। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राज्य में तीन दिनों की कसरत कर अपने चेहरे पर से पर्दा हटाया तो एक उदार चेहरा भी सामने आ गया। लगे हाथ उसने धर्म सापेक्ष राजनीति की वकालत कर यह साफ कर दिया कि हिन्दुत्व उसके ऐजेन्डे से अलग नहीं है। साथ ही भाजपा पर संघ की पकड़ भी जगजाहिर हो गई।

संघ की परम्परा से हटकर कराये गये आयोजन ने यह भी साबित कर दिया कि बिहार संघ के एजेन्डे पर हो न हो संघ प्रमुख की रुचि अब भी इस राज्य में बहुत है। अपने राजनीतिक संगठन भाजपा पर संघ की ढीली पड़ चुकी पकड़ को मजबूत करने में जुटे युवा प्रमुख श्री भागवत ने भी शुक्रवार को गांधी मैदान में यह स्वीकार किया कि नागरिक अभिनंदन की परम्परा संघ में नहीं रही है।

बावजूद आयोजन करने का निहितार्थ तो संगठन के कर्ताधर्ता ही बता पायेंगे लेकिन स्वयंसेवकों के माध्यम से भाजपा के छोटे कार्यकर्ताओं तक यह मैसेज जरूर गया कि संघ की चाहत ही भाजपा के लिए सवरेपरि है। तभी तो पार्टी की बैठकों में हलचल मचा देने वाले भाजपा नेता अनुशासित सिपाही की तरह संघ प्रमुख के कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी हों या प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह सबके सब गणवेश धारण किये हुए थे।

पहले दो दिनों की बैठकों की चर्चा करें तो ऐसा लगाता है कि संघ की चाहत है कि   भाजपा के जनाधार में व्यापकता और छवि में पैनापन हो। लेकिन इसके लिए वह जल्दी में भी नहीं दिखा। इसलिए पहले राजधानी में साधु संतों और जातीय प्रमुखों के साथ बैठकें कर उनसे यह अनुरोध किया गया कि ऐसी बैठकें प्रखंड स्तर पर भी हों। लेकिन वह आरएसएस के बैनर तले हो।

दोनों बैठकों में समरसता और सद्भाव के बहाने अपने एजेन्डे पर चर्चा हुई। हलांकि संघ प्रमुख श्री भागवत ने अपने नागरिक अभिनंदन में इन सभी कयासों को खारिज करते हुए साफ कहा कि हमें अपने जनाधार की चिंन्ता से ज्यादा देश की एकता की चिंता है। हमारा जनाधार तो इन स्वयंसेवकों के काम के सहारे ही आगे पढ़ता है। सबको स्वयंसेवक बनने का न्योता देकर उदार चेहरे को सामने लाने की कोशिश हुई तो

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