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दो टूक

बढ़े वेतनमान के साथ होलिकोत्सव को जोड़कर राज्यकर्मी खुशियों का इजहार कर रहे हैं, पर उन्हीं में से एक तबका विसंगतियों को लेकर असंतुष्ट है। आज तक जितने भी वेतनमान लागू हुए हैं, शायद ही उसके ढांचे ने शत-प्रतिशत कर्मियों को खुश किया हो। दरअसल केंद्र के साथ राज्यों के पद और वेतन ढांचों को जब एक फ्रेम में रखकर वेतनमान निर्धारित किया जाता है, तो कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां होती ही हैं। पहले से अधिक वेतन पा रहे कर्मियों को कभी राशि की हानि भी हो जाती है। पर, मूल बात यह है कि इसे निर्धारित और लागू करनेवालों की मंशा सही होनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि वह कर्मियों के प्रतिनिधियों के साथ मिल-बैठकर उनका असंतोष दूर करने की दिशा में पहल कर, तभी उन्हें लगेगा कि वे ठगे नहीं गये।

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