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'रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट में विसंगतियां थीं'

'रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट में विसंगतियां थीं'

बहुचर्चित रुचिका गिरहोत्रा मामले में पीडि़त पक्ष के वकील पंकज भारद्वाज ने शनिवार को रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें कई विसंगतियां थीं।

पिछले 13 वर्षो से इस मामले की निशुल्क पैरवी करने वाले भारद्वाज ने कहा, ''हमें चिकित्सकीय रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां मिली, जिन्होंने मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभाई।

रुचिका की आत्महत्या के बाद पुलिस को जो रिपोर्ट सौंपी गई उसमें कहा गया था कि उसने अधिक मात्रा में पतले होने की दवा का निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन कर लिया था।''

रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) ने तैयार की थी।

भारद्वाज ने कहा, ''ऐसा कम ही होता है कि किसी की मौत पतले होने वाली दवा के सेवन करने से हो जाए। विभिन्न चिकित्सकीय औपचारिकताओं और कानूनी जटिलताओं से बचने और मामले को रफादफा करने के लिए यह कारण दिया गया था।''

गौरतलब है कि 12 अगस्त 199० को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ र्दुव्‍यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की एकमात्र गवाह आराधना ही हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बीते सोमवार को इस मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी और उस पर 1००० रुपये का जुर्माना भी लगाया था लेकिन 1० मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया।

भारद्वाज ने कहा, ''राठौर द्वारा परिवार पर हुए अत्याचार की वजह से रुचिका ने आत्महत्या की थी।  हम उच्च न्यायालय में अपील करेंगे कि इस मामले की दोबारा जांच हो और राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगे।''

 

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