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नए साल की छुट्टियां

नए साल की छुट्टियां

नए साल की  छुट्टियां पास आ चलीं थीं। ‘‘मैं नए साल की छुट्टियां अपने दादाजी के साथ क्यूशू में बिताने वाली हूं।’’ मिगिता सबको बताती फिरती। और ताई-चान, जिसे विज्ञान के प्रयोग करना पसंद था, कहता, ‘‘मैं अपने बड़े भाई के साथ भौतिक विज्ञान की प्रयोगशाला देखने जाऊंगा।’’ उसे इसी का इंतजार था। ‘‘फिर मिलेंगे,’’ कहते हुए चलते-चलते भी बच्चों एक-दूसरे को अपनी-अपनी योजनाएं बताते जा रहे थे। तोत्ता-चान अपने डैडी और मां के साथ स्कीइंग के लिए गयी। डैडी के ही आर्केस्ट्रा में निर्देशक व सैलो बजाने वाले मित्र हाइदो साइतो का शीघा के पहाड़ों पर एक खूबसूरत-सा घर था। वे हरेक सर्दी उनके ही साथ उसी जगह बिताते थे। तोत्ता-चान जब बहुत छोटी थी, तभी से स्कीइंग सीख रही थी।

घोड़े से खिंचने वाली स्लेज गाड़ी पर बैठकर स्टेशन से स्कीइंग करने की जगह पर पहुंचना पड़ता था। यहां चारों ओर सपाट बर्फ की सफेदी रहती थी। सारी पहाड़ियां, सारे ढलान, बर्फ से ढके रहते। लोगों के पास ठहरने के लिए श्री साइतो जैसे घर नहीं थे, उनके लिए यहां एक जापानी सराय बनी थी। पर इस साल तोत्ता-चान के लिए बात ही कुछ दूसरी थी। आखिर अब वह  पहले दर्जे में पढ़ने लगी थी। उसने थोड़ी बहुत अंग्रेजी भी सीख ली थी। डैडी ने उसे ‘धन्यवाद’ कहना भी सिखा दिया था। हरेक विदेशी जो तोत्ता-चान को बर्फ के बीच स्की पहने देखता, जरूर उससे कुछ कहता। शायद वे कहते हों, ‘‘कितनी प्यारी बच्ची है।’’ या कुछ ऐसी ही दूसरी बात। तोत्ता-चान वह सब समझती नहीं थी।  पर अब वह अपना सिर हिलाकर जवाब देती, ‘‘थैंक यू।’’ उसे यह सोच-सोच कर आश्चर्य होता कि सिर्फ ‘‘थैंक यू’’ कहने से कितने लोगों से दोस्ती की जा सकती है। एक दिन एक नौजवान सामने आया। उसने इशारों से कुछ कहा। तोत्ताे-चान को लगा कि वह जानना चाह रहा है कि ‘‘क्या तुम मेरी स्की के अगले हिस्से पर बैठकर मेरे साथ फिसलना चाहोगी?’’ डैडी ने उसे कहा कि वह जा सकती है।
 
तोत्ता-चान ने उत्तर में ‘‘थैंक यू’’ कहा। तब उस नौजवान ने अपने दोनों पैर सटा लिये। तोत्ता-चान को स्की के अगले हिस्से में उकड़ं बिठाया। तब वे सबसे लंबी और आसान ढलान पर से नीचे को फिसलने लगे। लगता था मानो वे हवा से भी तेज जा रहे हों। तोत्ता-चान दोनों हाथों से अपने घुटनों को जोर-से भींचकर बैठी थी, ताकि वह आगे को न लुढ़क जाए। उसे बेहद मजा भी आ रहा था। आखिर वे नीचे पहुंच कर रुके। पास खड़े दर्शकों ने तालियां बजाईं। स्की पर से उतरकर तोत्ता-चान ने दर्शकों की ओर झुककर उनका अभिवादन स्वीकार किया। साथ में कहा, ‘‘थैंक यू’’। इस पर सबने और जोर-से तालियां बजाईं।

यह तो तोत्ता-चान को काफी बाद में पता चला कि उस नौजवान का नाम श्नाइडर था। वह विश्वविद्यालय का विख्यात स्कीअर था और हमेशा चांदी की बनी स्की-छड़ियां इस्तेमाल करता था। उस दिन जो बात उसे अच्छी लगी थी वह कुछ दूसरी ही थी। जब वे ढलान पार कर नीचे पहुंचे, और लोग तालियों से उनका स्वागत कर चुके, तो वह झुककर उसके पास बैठ गया। उसने तोत्ता-चान का हाथ अपने हाथों में थामा और तब उसने भी तोत्ताे-चान को ‘‘थैंक यू’’ कहा। मानो वह कोई खास हस्ती हो। उसने तोत्ताे-चान को बच्चा नहीं माना था। उसका व्यवहार बिल्कुल ऐसा था मानो तोत्ता-चान भी कोई वयस्क महिला हो। जब वह नीचे झुका था, तभी तोत्ताे-चान को पता चल गया था कि वह एक भद्रपुरुष है।

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