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कोटला में श्रीलंका की लुटिया डुबोने उतरेगी टीम इंडिया

कोटला में श्रीलंका की लुटिया डुबोने उतरेगी टीम इंडिया

कुछ चोटी के खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में भी जानदार और जांबाज प्रदर्शन करके सीरीज अपने नाम करने के बाद भारत अब पांचवें और अंतिम वनडे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में भी अपनी मजबूत टीम लेकर श्रीलंका के बचे खुचे अहंकार को मटियामेट करने के लिए रविवार को नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर उतरेगा।

श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगकारा जब अपनी टीम भारत लेकर पहुंचे थे तो उन्होंने बड़े गर्व से कहा था कि वे  आखिरी किला फतह करने के लिए आये हैं, लेकिन भारतीय टीम ने उसे टेस्ट मैचों में 2-0 से करारी शिकस्त दी और अब वनडे सीरीज में भी कुछ मैचों में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और मध्यक्रम की रीढ़ युवराज सिंह की गैरमौजूदगी के बावजूद 3-1 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।

भारतीय टीम ने श्रीलंका का घमंड तोड़ दिया है जो रविवार को अब अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए उतरेगा। संगकारा की टीम बांग्लादेश में अगले महीने शुरू होने वाली त्रिकोणीय सीरीज से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत दर्ज करने के लिये बेताब है लेकिन भारत किसी तरह की ढिलायी बरतने के मूड में नहीं है और वह इस दौरे का अंत जीत के साथ करने के लिये प्रतिबद्ध है।

भारत ने टीम में खास बदलाव नहीं करके संकेत दे दिये कि वह किसी तरह की ढिलायी बरतने के लिये तैयार नहीं है। धोनी दो मैच का प्रतिबंध झेलने के बाद यहां वापसी करेंगे जबकि स्वाइन फ्लू से उबरने के बाद वापसी करने वाले एस श्रीसंत के आने से तेज गेंदबाजी विभाग को मजबूती मिलेगी। सुदीप त्यागी या अशोक डिंडा को भी यहां पदार्पण का मौका मिल सकता है।

इस साल सितंबर में चैंपियन्स लीग से आलोचकों के निशाने पर रही कोटला की पिच भी करारा जवाब देने के लिए तैयार है। पिच में घास उग आयी थी लेकिन वनडे के माकूल बनाने के लिए विकेट को सपाट बना दिया गया। क्यूरेटर विजय बहादुर मिश्रा के अनुसार यह जीवंत विकेट होगी जिसमें 280 रन का स्कोर चुनौतीपूर्ण होगा।

मिश्रा ने कहा कि यह वही विकेट है जिसका उपयोग 31 अक्टूबर को भारत-आस्ट्रेलिया मैच के लिए किया गया था लेकिन अब यह पहले से बेहतर होगा। यह जीवंत विकेट होगा और जो भी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी उसे आसानी से 250 से अधिक रन बनाने चाहिए। मुझे लगता है कि इस विकेट पर 280 रन का स्कोर मजबूत माना जा सकता है।

दोनों टीमों ने अब तक गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण में लचर प्रदर्शन किया है लेकिन भारत बल्लेबाजी में अंतर पैदा करने में सफल रहा जिससे उसने पहले, तीसरे और चौथे मैच में जीत दर्ज करके लगातार पांचवीं सीरीज जीती। भारतीय टीम के लिए अच्छा यह रहा कि उसके किसी न किसी बल्लेबाज ने एक छोर संभाले रखकर टीम को मंजिल तक पहुंचाया।

गौतम गंभीर शुरुआती मैचों में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाये थे लेकिन उन्होंने कोलकाता में नाबाद 150 रन की मैच विजेता पारी खेली और अपने घरेलू मैदान में वह यही फार्म बरकरार रखकर यहां अपना रिकार्ड सुधारने की कोशिश करेंगे। दिल्ली के ही विराट कोहली ने भी पिछले मैच में शतक जमाकर टीम में अपना स्थान मजबूत किया है। युवराज की अनुपस्थिति में फिर से उन पर बड़ी जिम्मेदारी होगी।

वीरेंद्र सहवाग कप्तानी में बल्ले से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये थे लेकिन अब धोनी के आने से वह अपना ध्यान केवल बल्लेबाजी पर लगायेंगे और अपने घरेलू मैदान में यादगार पारी खेलना चाहेंगे जहां अब तक उनका बल्ला रन नहीं उगल पाया है। धोनी अच्छी फार्म में चल रहे हैं और विश्राम के बाद तरोताजा होकर मैदान पर उतरेंगे जिसका उन्हें और टीम को फायदा मिलेगा।

गेंदबाजी भारत के लिए चिंता का विषय है। दिल्ली के दोनों तेज गेंदबाज आशीष नेहरा और इशांत शर्मा काफी खर्चीले साबित हुए हैं। इशांत और प्रवीण कुमार की जगह श्रीसंत और अशोक डिंडा के आने से कुछ बदलाव की उम्मीद की जा रही है। भारतीय स्पिनरों हरभजन सिंह और रविंदर जडेजा ने बीच के ओवरों में श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर लगाम कसे रखी और कोटला की पिच से इन दोनों को पूरी मदद मिलने की संभावना है।

फील्डिंग भारतीयों की सबसे बड़ी चिंता है। पिछले मैच में उपुल थरांगा और संगकारा दोनों ने जीवनदान का पूरा फायदा उठाया। धोनी बांग्लादेश दौरे से पहले इस विभाग में कुछ सुधार देखना चाहेंगे।

भारतीय टीम श्रीलंकाई बल्लेबाजी के केंद्र तिलकरत्ने दिलशान का तोड़ ढूंढने में कुछ हद तक सफल रही जो पिछले दो मैच में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाये। दिलशान के लिए कोटला का मैदान नया नहीं है। आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की तरफ से खेलने वाला यह आक्रामक बल्लेबाज दिल्ली को अपना दूसरा घर मानता है और इस स्टेडियम की नस नस से अच्छी तरह वाकिफ है। भारतीयों को उन पर लगाम लगाये रखने के लिए फिर से कारगर रणनीति अपनानी होगी।

सलामी बल्लेबाज उपुल थरांगा ने सीरीज में निरंतर अच्छा प्रदर्शन किया है। संगकारा के प्रदर्शन में उतार चढ़ाव देखने को मिला लेकिन पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने का नहीं चल पाना टीम के लिये बल्लेबाजी में सबसे बड़ी चिंता है। जयवर्धने ने अब तक चार मैच में केवल 77 रन बनाये हैं जिससे श्रीलंका के निचले क्रम में कम अनुभवी बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ा है।

सनथ जयसूर्या इस मैच में उतरते ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 साल पूरे कर देंगे और बायें हाथ का यह आक्रामक बल्लेबाज इस मौके को यादगार बनाना चाहेगा। उन्हें अब भी हालांकि मध्यक्रम में खेलने के लिए सामंजस्य बिठाना पड़ रहा है।

कोटला की पिच को देखते हुए श्रीलंका को यहां मुथैया मुरलीधरन की कमी खल सकती है जो सीरीज से बाहर हो गये हैं। सूरज रणदीव ने हालांकि स्पिन विभाग का जिम्मा अच्छी तरह से संभाला है लेकिन टीम को लसिथ मालिंगा और नुवान कुलशेखरा जैसे अनुभवी तेज गेंदबाजों ने निराश किया है। चनाका वेलेगेदारा फिट होकर रविवार के मैच में मालिंगा की जगह ले सकते हैं।

टीम इस प्रकार हैं:
भारत : महेंद्र सिंह धोनी (कप्तान), वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, विराट कोहली, सुरेश रैना, दिनेश कार्तिक, रविंदर जडे़जा, हरभजन सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, एस श्रीसंत, प्रज्ञान ओझा, सुदीप त्यागी और अशोक डिंडा में से।

श्रीलंका : कुमार संगकारा (कप्तान), तिलकरत्ने दिलशान, उपुल थरांगा, महेला जयवर्धने, तिलना कदाम्बी, तिलन समरवीरा, चमारा कापुगेदारा, तिसारा परेरा, सूरज रणदीव, सुरांगा लखमल, अजंता मेंडिस, नुवान कुलशेखरा, लेसिथ मालिंगा, एम पुष्पकुमार में से।

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