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कोई समाज नहीं चाहता आतंकवाद

ोई भी समाज आतंकवाद का हिमायती नहीं होता है। इसको बातचीत से सुलझाना होगा। पाकिस्तान में लोकतंत्र का बुरा हाल है। कोई भी सरकार अपना टर्म पूरा नहीं कर पा रही। इस स्थिति में पड़ोसी देशों को स्थिति सुधारने में उसकी मदद करनी होगी। पाकिस्तान इंस्टीच्यूट ऑफ लेबर एडुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक व मजदूर संघ के नेता करामत अली ने दोनों देशों के बीच बातचीत से ही आतंकवाद जसी समस्या का समाधान होने की बात कही। वह ‘साझी संस्कृति के पक्ष में नागरिक’ मंच के जरिए दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए जारी हस्ताक्षर अभियान के क्रम में वह राजधानी में थे।ड्ढr ड्ढr कंट्री क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कोई घटना होती है तो नेताओं की बयानबाजी शुरू हो जाती है। श्रीलंका टीम पर हमले के बाद हमले में भारत के हाथ जसे अनर्गल बयान आए हैं। पटना वीमेंस कॉलेज में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए श्री अली ने कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी जाति, धर्म या सीमा से बंधा नहीं होता है।ड्ढr ड्ढr अतिथियों का स्वागत डा. डॉरिस डिसूजा ने किया। इस मौके पर अरशद अजमल, फादर मंत्रा व फादर देवासिया भी उपस्थित थे। दरभंगा हाउस के इतिहास विभाग में छात्रों के साथ बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि हर घटना के बाद एक-दूसर पर दोषारोपन करने से स्थिति बिगड़ती है। मीडिया को भी नेताओं का वजन देखकर ही बयानों को तबज्जो देनी चाहिए। वहीं गांधी संग्रहालय में ‘पाकिस्तानी मेहमान से मुलाकात’ कार्यक्रम में उन्होंने दोनों सरकारों को मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए कार्ययोजना तैयार करने की वकालत की। इस दौरान गांधी संग्रहालय के मंत्री डा. राी अहमद व अन्य बुद्धिाीवी उपस्थित थे।

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