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टैक्स को लेकर कुछ खट्ठा कुछ मीठा रहा ये साल

गिफ्ट पर कस गई टैक्स की डोरी
इस बार के बजट में गिफ्ट टैक्स को लेकर कुछ परिवर्तन किए गए हैं। गिफ्ट टैक्स के नियमों में हुए बदलाव से गिफ्ट लेने वाली की टैक्स देनदारी बढ़ गई। सरकार ने बजट में नए प्रावधान किए। गिफ्ट टैक्स का कानून कुछ रिश्तों और अवसरों पर दे जाने वाले उपहारों को टैक्स के दायरे से मुक्त रखता है। लेकिन जब बात किसी ऐसा व्यक्ति से उपहार लेने की आती है जो आपका संबंधी नहीं है तो उस स्थिति में 50,000 रुपये की सीमा लागू हो जाती है। यह सीमा पूरे वित्तीय वर्ष के लिए लागू है।

यदि कोई व्यक्ति पूरे साल के दौरान इस सीमा से ज्यादा राशि के उपहार स्वीकार करता है तो उपहार की पूरी राशि उस साल की आय में जोड़ दी जाएगी और उस पर लागू दरों के हिसाब से टैक्स लगेगा। इस राशि को अन्य स्नोत से आय के रूप में दर्शाना होगा। पत्नी, माता-पिता, पत्नी और खुद के भाई-बहन, माता-पिता के भाई-बहन, पत्नी या स्वयं के सगे पूर्वज और आश्रित से मिलने वाला उपहार टैक्स के दायरे में नहीं माना जाएगा।  बजट में प्रस्ताव दिया गया है कि निम्नलिखित वस्तुओं को किसी असंबधित व्यक्ति द्वारा उपहार स्वरूप दिए जाने पर टैक्स देना पड़ेगा। अगर वर्ष में इसकी कुल वैल्यू 50,000 रु से ज्यादा है।
 
शेयर
सूचीबद्ध शेयरों के लिए तो वैल्यू निकाली जा सकती है लेकिन अनलिस्टेड शेयरों के लिए तिकड़म वाला काम है। प्रॉपर्टी स्टांप डय़ूटी को वैल्यू प्रॉपर्टी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। समस्या तब उत्पन्न होगी जब इसे स्टांप डय़ूटी वैल्यू से कम कीमत पर बेचा जाए।
 
ज्वैलरी
नए टैक्स कोड में वैल्यू निकालने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। इस टैक्स कोड में फेयर मार्केट वैल्यू  का प्रयोग किया जाएगा। इससे बहानेवाजी को कम किया जा सकेगा। जिससे गलत तौर पर टैक्स बचाना नामुमकिन हो जाएगा।
 
कला की कीमत
ऐसा क्षेत्र जो कि काफी ट्रिकी है। कला की सही कीमत लगा पाना आसान नहीं है। साथ ही ये भी संभव है कि उपहार किसी कलाकार ने ही दिया हो।

नया टैक्स कोड
नए टैक्स कोड में रीजनेबल टैक्स रेट का प्रारूप रखा गया है। 10 लाख तक 10 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान आकर्षक है। वर्तमान में 10 लाख पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। यह काफी उचित दर है, मेरा मानना है कि इससे टैक्स चोरी कम होगी और सरकार के पास टैक्स का क्लेक्शन बढ़ेगा। कैपिटल गेन लेने वाले लोगों को इस नए टैक्स कोड में फायदा होने जा रहा है। इसमें कॉस्ट इंफ्लेशन इंडैक्स का मूल्यांकन वर्ष 2000 से किया जाएगा न कि वर्तमान में लागू 1981 के हिसाब से। भारत में लाखों करदाता ऐसे हैं जो इनकम टैक्स कानून में रिहाइशी मकान की छूट उठाने के लिए लोन लेकर अपनी मकान बनवाते हैं। होम लोन लेने वाले करदाताओं को वर्तमान में 1.5 लाख रुपये तक ब्याज राशि और धारा-80 सी के तहत एक लाख रुपये मूलधन की वापसी पर छूट मिलती है। नए कोड में दोनों तरह की रियायतें नहीं है।

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