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एक रैक यूरिया खाद की कालाबाजारी

किसानों में वितरित करने के लिए जिले में आई लगभग ढाई हजार टन यूरिया खाद कालाबाजारी की भेंट चढ़ गई। पीसीएफ गोदाम से इस खाद को व्यापारियों के हवाले कर दिया गया। किसान एक-एक बोरी खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

उन्हें बाजार से महँगे दामों में खाद खरीदनी पड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक खाद में यह खेल इफ्को और पीसीएफ के अधिकारियों की साठगाँठ से हुआ। डीएम डॉ. बलकार सिंह ने खाद घोटाले के उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं।

जिले के किसानों की जरूरत के दृष्टिगत सितम्बर माह में एक रैक यूरिया खाद मात्र 2447 एमटी जिले में उतारी गई थी। इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएस तोमर ने कृषि विभाग के अनुरोध पर मँगाई गई इस खाद को पीसीएफ के गोदाम में रखवा दिया। बताया जाता है कि कुछ दिन बाद पूरी की पूरी खाद आईएफडीसी के केन्द्रों पर भेज दी गई, जो इफ्को के अपने निजी डीलर हैं।

एआर कोआपरेटिव मोहम्मद असलम के मुताबिक इस खाद को सोसायटियों और कोआरेटिव के माध्यम से किसानों को बांटा जाना चाहिए था, जबकि इफ्को और पीसीएफ के अधिकारियों ने आपसी साठगाँठ से इस खाद को कोआपरेटिव के जरिए किसानों में वितरित करने के बजाए प्राइवेट सेक्टर के दुकानदारों के हवाले कर दिया।

उन्होंने इसके पीछे घपलेबाजी की आशंका भी जाहिर की। उनके मुताबिक डीएम ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच कराने के निर्देश दिए हैं। उधर पीसीएफ के जिला प्रबंधक सुरेश बाबू का कहना है कि खाद इफ्को की थी, जिसे आईएफडीसी के डीलरों को आवंटित कर दिया गया। उनके मुताबिक कुछ खाद कोआपरेटिव सेक्टर के माध्यम से भी किसानों को वितरित कराई गई।

उन्होंने यह भी कहा कि जिले में खाद की कमी का मुख्य कारण एआर कोआपरेटिव की उदासीनता है। वह किसानों की आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद की डिमांड शासन को नहीं भेजते हैं। उधर अफसरों के इस कारनामे का खामियाजा जिले के किसान भुगत रहे हैं।

किसी भी एजेन्सी में यूरिया खाद उपलब्ध न होने से उन्हें खुले बाजार से महंगे दामों में यूरिया खरीदनी पड़ रही है। डीएम डॉ. बलकार सिंह ने बताया कि इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएस तोमर का जवाब-तलब करके खाद घोटाले के जाँच के आदेश दिए गए हैं।

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