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एनएच निर्माण को ले आक्रमक होगी राज्य सरकार

राष्ट्रीय उच्च पथों के निर्माण के मुद्दे पर राज्य सरकार ने आक्रामक रूख अपनाने का निर्णय किया है। दर्जनों बार केन्द्रीय भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रलय को बिहार के एनएच की जर्जर स्थिति से अवगत कराने के बाद भी केन्द्र सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है।

वैसे तो राज्य सरकार ने सभी राष्ट्रीय उच्च पथों (एनएच) को फोर लेन और सभी राज्य उच्च पथों (एसएच) को दो लेन बनाने का निर्णय कर लिया है। पर केन्द्र इससे सहमत नहीं है। केन्द्र सूबे में अब तक मात्र 799 किमी एनएच ही फोर लेन बना रहा है।

इसमें ईस्ट-वेस्ट कारिडोर के तहत चयनित 513.30 किमी और स्वर्णिम चतुभरुज परियोजना के तहत चयनित 205.70 किमी सड़क शामिल है। अभी हाल ही में हाजीपुर-मुजफ्फरपुर (करीब 60 किमी) एनएच को पीपीपी मोड पर फोर लेन करने का निर्णय हुआ है। इससे बचे 2875 किमी एनएच को दो लेन करने की ही योजना है।

राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व जर्जर 1725 किमी एचएच को दो लेन में बदलने की कार्ययोजना केन्द्र सरकार को सौंपते हुए उसकी स्वीकृति की इच्छा जतायी थी। इन एनएच पर कुल 2868 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। केन्द्र सरकार अब तक राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर कुंडली मार पर बैठी हुई थी।

दो दिन पहले उसी कार्ययोजना में से केन्द्र ने छह सड़कों का चयन कर उसे विश्व बैंक के सहयोग से दो लेन बनाने का निर्णय किया है। इसमें अनीसाबाद-औरंगाबाद-हरिहरगंज-149 किमी, शिवहर-सीतामढ़ी-जयनगर-नरहिया-176 किमी, बीरपुर-बिहपुर- 134 किमी, बेतिया-कुशीनगर- 87 किमी, मुंगेर-भागलपुर-मिर्जाचौकी -125 किमी और फतुहा-हरनौत-बाढ़- 69 किमी  शामिल है।

पर राज्य सरकार की चिन्ता यह है कि केन्द्र ने दो साल बाद मात्र 740 किमी को दो लेन बनाने का निर्णय किया। कार्ययोजना से बचे 985 किमी को दो लेन कब बनाया जाएगा।

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