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सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाओ

सहारनपुर-उत्तराखंड मिलाओ संघर्ष समिति ने गांधी पार्क में प्रदर्शन किया। समिति के सदस्यों ने कहा कि जब तक सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल नहीं किया जाता, प्रदर्शन जारी रहेगा। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

समिति और महासभा के कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क पहुंचकर सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल किए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक सहारनपुर को उत्तराखंड में विलय नहीं किया जाता, उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। बात नहीं बनी तो सहारनपुर से देहरादून आने-जाने वाले वाहनों का संचालन बंद किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने एडीएम को ज्ञापन सौंपा।

समिति के जिला अध्यक्ष पंकज भैया ने कहा कि सहारनपुर के करीब 912 गांव उत्तराखंड में शामिल होना चाहते हैं। देहरादून और हरिद्वार जिले भी पहले सहारनपुर में थे। सहारनपुर उत्तराखंड का मुख्य व्यापारिक केंद्र है। वहां निवास करने वाले 70 हजार लोग गढ़वाली हैं। इसमें 90 प्रतिशत क्षत्रिय लोग हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान उन्होंने सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाए जाने की मांग उठाई थी लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया। समिति के संरक्षक साहब सिंह पुंडीर ने कहा कि वर्तमान में सहारनपुर का विकास कार्य चौपट हो गया है।

कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बिजली गुल रहने से उद्योगों पर बुरा असर पड़ने लगा है। सहारनपुर के उद्योग उत्तराखंड में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहारनपुर में कई बड़े-बड़े उद्योग हैं, कहा कि सहारनपुर को उत्तराखंड में मिलाने पर आर्थिक विकास होगा। इस अवसर पर समिति के महामंत्री सुभाष चौहान, महेश गुप्ता, रविंद्र चौहान, योगेश पुंडीर, संदीप ठाकुर, विशू, रोहित चौहान, मोनू ठाकुर, जोनी, अनिलवास, हैप्पी ठाकुर आदि शामिल थे।

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