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शाही महल संहार में शामिल थे ज्ञानेंद्र व पारसः रिपोर्ट

शाही महल संहार में शामिल थे ज्ञानेंद्र व पारसः रिपोर्ट

खुद को नेपाल के शाही परिवार का अंगरक्षक बताने वाले एक कैदी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2001 में शाही महल में हुए संहार में अपदस्थ नरेश ज्ञानेंद्र और उनके पुत्र पारस संलिप्त थे। गौरतलब है कि इस घटना में पूर्व नरेश वीरेंद्र और उनके परिवार के अधिकतर सदस्यों की मौत हो गयी थी।

ज्ञानेंद्र षडयंत्र की कई कहानियों के केंद्र में रहे हैं जिनमें से एक शाही महल में हुए संहार की घटना के बारे में है। इस संहार में उनके ज्येष्ठ भाई और देश के लोकप्रिय नरेश रहे वीरेंद्र और युवराज दीपेंद्र की शाही परिवार के अधिकतर सदस्य मारे गये थे। युवराज दीपेंद्र ने कथित तौर पर नशे की हालत में संहार को अंजाम दिया था।
   
काठमांडो पोस्ट अखबार के ऑनलाइन संस्करण ई-कांतिपुर के मुताबिक, एक दंपती की हत्या के मामले में वीरगंज जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे लाल बहादुर मागर का दावा है कि वह शाही संहार का चश्मदीद है। संवाद समिति आरएसएस के हवाले से आयी इस खबर के मुताबिक, लाल बहादुर का दावा है कि पूर्व नरेश के परिवार की हत्या में पूर्व युवराज पारस का हाथ था। उसका यह भी दावा है कि जब संहार हुआ, तब वह दीपेंद्र के अंगरक्षकों में से एक था।

ई-कांतिपुर की खबर के मुताबिक, जब माओवादी सांसद लीला कुमार बागा गुरुवार को जेल में लाल बहादुर से मिलने गये तो उसने आरोप लगाया कि संहार में पारस संलिप्त है। उसने यह भी आरोप लगाया कि संहार में ज्ञानेंद्र का भी हाथ है। जून 2008 में 64 वर्षीय ज्ञानेंद्र शाही महल से चले गये थे। इससे दो सप्ताह पहले 601 सदस्यीय संविधान सभा ने देश में राजशाही खत्म कर दी थी।
   
अप्रैल 2006 से ज्ञानेंद्र के खिलाफ शुरू हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद जब सीपीएन माओइस्ट गत वर्ष के संविधान सभा के चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी तो देश में 240 साल पुरानी राजशाही को खत्म कर दिया गया। गत वर्ष मई में पद छोड़ने को मजबूर किये गये ज्ञानेंद्र अब आम नागरिक हैं और उन्हें नेपाली कैबिनेट के मंजूर किये प्रस्तावों के तहत कर अदा करना होगा। सरकार ने घोषणा की है कि शाही संपत्ति पर कर लगाये जायेंगे।

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