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एमिटी, एमएलयूसी के कई पाठ्यक्रम गैर-मान्यता प्राप्त

निजी विश्वविद्यालयों के कामकाज की समीक्षा करने वाली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की समिति ने एमिटी जैसी कई ऐसी संस्थाओं के कामकाज में अनियमितता पाई है जिसमें गैर मान्यता प्राप्त पाठयक्रमों का संचालन शामिल है।

यूजीसी की एक समिति ने पाया कि एमिटी की ओर से चलाया जा रहा कोई भी नवोन्मेषी पाठ्यक्रम उपयुक्त सांविधिक निकाय से मान्यता प्राप्त नहीं है। यूजीसी ने अलग समितियों का गठन किया था जिसका उद्देश्य आठ विश्वविद्यालयों के कामकाज की जांच करना था। इसका मकसद उसकी ओर से पोषित मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की सूची में इन्हें शामिल करना था।

यूजीसी समिति ने विशेष तौर पर उप्र के एमिटी विश्वविद्यालय और मेघालय स्थित मार्टिन लूथर क्रिश्चन विश्वविद्यालय (एमएलयूसी) के कामकाज की आलोचना की। प्रोफेसर बी एस सोडे़के नेतृत्व वाली समिति ने इस वर्ष जुलाई में एमिटी का दौरा किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विश्वविद्यालय उभरते हुए क्षेत्र में कई तरह के नए पेशेवर और तकनीकी कार्यक्रम पेश कर रहा है। लेकिन किसी पाठयक्रम को उपयुक्त पेशेवर परिषद से मान्यता नहीं मिली हुई है।

समिति ने कहा है कि बार काउंसिल आफ इंडियासे स्कूल आफ ला को मान्यता मिली हुई है जो विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले प्राप्त की गई थी। विश्वविद्यालय केलिए इस विषय पर फिर से मान्यता प्राप्त करने की जरूरत है। जांच का ब्यौरा देते हुए समिति ने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय की स्थापना उप्र अधिनियम के तहत की गई थी और इसका परिचालन लखनऊ और नोएडा में हो रहा है और इसके माध्यम से एमबीएस और एमसीए जैसे कई पेशेवर कार्यक्रम पेश किये गए हैं।

यूजीसी नियमों के तहत वह ऐसा करने को अधिकृत नहीं हैं। इसके अलावा इन्होंने ऐसे पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए यूजीसी, एआईसीटीई, डीईसी की संयुक्त समिति से मान्यता नहीं प्राप्त की है। विश्वविद्यालय कई तरह के कार्यक्रमों का संचालन और कई डिग्रियां प्रदान करता है जहां काफी संख्या में छात्र पढ़ते हैं। यह उपयुक्त नहीं है क्योंकि पाठ्यक्रमों का दायरा संकुचित है और इसमें गहराई की कमी है।

इन पाठ्यक्रमों को उपयुक्त संबद्धता एजेंसी से मान्यता प्राप्त करने की जरूरत बतायी है। एमएलसीयू के कई स्थानों पर परिसर स्थापित करने के बीच रपट के अनुसार एमएलसीयू को तत्काल प्रभाव से इन केंद्रों को बंद करने को कहा जा सकता है।

 

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