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राठौर की पेंशन कटेगी, पुलिस मेडल भी छीन सकता है

राठौर की पेंशन कटेगी, पुलिस मेडल भी छीन सकता है

रुचिका यौन शोषण कांड मे बढ़ते दबाव के बाद अब केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। केंद्र सरकार पूर्व डीजीपी एस.पी.एस.राठौर को दिए मेडल को वापस लेगी। इसके साथ ही उनकी पेंशन भी बंद की जा सकती है। इतना ही नहीं सीबीआई ने भी राठौर के खिलाफ हाईकोर्ट में नई चार्जशीट दाखिल करेगी।

गृह मंत्रालय ने कहा है कि हरियाणा के पूर्व डीजीपी एस.पी.एस.राठौर को केंद्र सरकार की ओर से दिया गया मेडल वापस लिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया एक सप्ताह में शुरू कर दी जाएगी। मीडिया में जिस तरह से रुचिका मामले को उठाया जा रहा है, उसे केंद्र सरकार भी दबाव में आ गई है। केंद्रीय कानून मंत्री वीएस मोइली ने कहा कि रुचिका को न्याय दिलाने में पूरी मदद की जाएगी। हमने सॅलिसीटर जनरल से भी बात की है। उनकी सलाह के बाद जो भी जरूरी कदम होगा, उसे उठाया जाएगा।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने रुचिका यौन शोषण कांड के प्रमुख आरोपी पूर्व डीजीपी एस.पी.एस.राठौर के बचाव से साफ इंकार कर दिया है। चौटाला का कहना है कि उनकी सरकार ने कभी भी राठौर को नहीं बचाया। चौटाला ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता करके पूरे मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने रुचिका मामले में राठौर की कोई मदद नहीं की। उनके पद के दौरान उन्हें कोई मदद नहीं की गई थी। बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंशीलाल की सरकार के दौरान राठौर को डीजीपी बनाया गया था। चौटाला ने कहा कि उन्होंने राठौर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होते  ही उन्हें हटा दिया था।

रुचिका मामले मे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को अब पूर्व केंद्रीय मंत्री शांताकुमार ने भी जिम्मेवार ठहराया है। पूर्व खाद्य एवं आपूर्ती मंत्री शांताकुमार ने कहा है कि उन्होंने भी 2002 में इस मामले में चौटाला को पत्र लिखा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। शांताकुमार ने कहा कि इस पत्र के संबंध में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी सूचित किया था।

शांताकुमार का कहना है कि 2002 में इस मामले के दोबारा तूल पकड़ने के बाद व्यक्तिगत तौर पर यह पत्र चौटाला को लिखा क्योंकि मुझे महसूस हुआ था कि इस दिशा में कोई कार्रवाई होनी चाहिए। रुचिका के पिता एससी गिरहोत्रा द्वारा वीरवार को इस मामले में दोषी पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को आश्रय देने के लिए ओमप्रकाश चौटाला को जिम्मेवार ठहराया था।

उन्हांेने आरोप लगाया था कि चौटाला सरकार में राठौर को बचाने की कोशिश की गई। शुक्रवार सुबह चौटाला ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने हर वो मुनासिब कार्रवाई की जो कानून के मुताबिक सही थी। लेकिन अब पूर्व केंद्रीय मंत्री शांताकुमार ने भी ओमप्रकाश चौटाला सरकार द्वारा इस मसले में नर्म रुख बरते जाने की निंदा की है। शांताकुमार ने यहां तक कहा है कि इस मामले में हरियाणा में पिछले 19 बरसों में जो भी सरकारें रहीं, वह रुचिका और उसके परिवार के साथ हुई नाइंसाफी से बच नहीं सकतीं।

गौरतलब है कि कल रुचिका के पिता सुभाष गिरोत्रा ने कहा था कि रुचिका के मामले को दबाए रखने के लिए राठौर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके लिए तब के मुख्यमंत्री भजन लाल, बंसी लाल और ओम प्रकाश चौटाला भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। उन दिनों राज्य के गृह सचिव जे.के. दुग्गल और डीजीपी आर.आर. सिंह ने राठौर के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा था, बावजूद इसके केस दर्ज नहीं किया था। अगर केस दर्ज हो जाता तो शायद रुचिका आत्महत्या न करती।  आशु पर केस दर्ज होने, घर पर पथराव, भद्दी टिप्पणियां और उनकी कार से दो बार एक्सीडेंट आदि के रूप में उनके परिवार ने जो कुछ झेला, रुचिका उससे डर चुकी थी। रुचिका ने उनकी गैर हाजिरी में जहर निगला था।

 

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