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वित्त वर्ष के अंत तक दस प्रतिशत तक होगी मुद्रास्फीति

वित्त वर्ष के अंत तक दस प्रतिशत तक होगी मुद्रास्फीति

देश में महंगाई की दर चालू वित्त वर्ष के अंत तक आठ प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। वैसे इस बात की भी आशंका है कि खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के चलते वित्त वर्ष के अंत तक यह दो अंक में पहुंच जाए।

रेलीगेयर कैपिटल मार्केट के अर्थशास्त्री और उपाध्यक्ष जय शंकर ने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत को महंगाई का खतरा पहले झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर आठ प्रतिशत पर पहुंचेगी, लेकिन हम इसके दो अंक में पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं कर सकते हैं।

थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई की दर नवंबर में बढ़कर 4.78 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अक्टूबर में यह 1.34 फीसदी के स्तर पर थी। खाद्य पदार्थों की महंगाई की दर 12 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में 1.30 प्रतिशत घटी है। इससे पिछले सप्ताह के दौरान यह 19.95 प्रतिशत के स्तर पर थी। लेकिन आलू और दालों जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें अभी भी कष्टदायी स्थिति तक ऊंची बनी हुई है।

शंकर ने कहा कि महंगाई का बढ़ता स्तर नीति के लिए चुनौती बना हुआ है। मुद्रास्फीतिक दबाव के चलते भारतीय रिजर्व बैंक को अपनी मौद्रिक नीति को कड़ा करना पड़ सकता है। अपनी अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के अंत तक मुद्रास्फीति के अनुमान को और ऊपर जाने की संभावना के साथ 6.5 प्रतिशत कर दिया था।

शंकर ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पहले ही 12 प्रतिशत पर है। खाद्य मुद्रास्फीति जुलाई से दो अंक पर चल रही है। रेलीगेयर हिचेंस हैरीसन की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ब्राजील, रूस, चीन तथा दक्षिण एशियाई देशों से ऊपर चल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, जहां इस समय भारत का सीपीआई 11.7 प्रतिशत है, वहीं ब्राजील का 4.3 प्रतिशत, रूस का 10.7 प्रतिशत, चीन का नकारात्मक 0.8 प्रतिशत, इंडोनेशिया का 2.8 प्रतिशत, थाइलैंड का नकारात्मक एक प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का 2.2 प्रतिशत है।

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