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जहर का तालाब बना एनसीआर

भारत के 85 फीसदी प्रमुख औद्योगिक इलाके जहर से लबालब हैं। यहां के हवा-पानी और जमीन में प्रदूषण का स्तर इंसानी बसावट के कतई नाकाबिल है। यह निष्कर्ष है केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट का।

बोर्ड ने देश के 88 औद्योगिक इलाकों में से 75 को बेहद खतरनाक स्थिति में पाया है। सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के गाजियाबाद का तीसरा, दिल्ली की औद्योगिक बस्तियों का 11वां और नोएडा का 12वां स्थान है।

बोर्ड के अध्यक्ष एस.पी. गौतम ने बताया, ‘गुजरात के अंकलेश्वर की हालत सबसे खराब है, क्योंकि प्रदूषण से निपटने का इसका ढांचा बेहद कमजोर है।’ गुजरात के ही वापी का दूसरा स्थान है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र 12 अत्यधिक प्रदूषित (अलार्मिग) श्रेणी के भीतर आते हैं। इनमें गाजियाबाद और नोएडा का नंबर क्रमश: तीसरा और 12वां है।

दिल्ली आनंद पर्वत, नारायणा, ओखला और वजीराबाद 11वें नंबर पर हैं। यह श्रेणी बताती है कि इन स्थानों में जहरीले रसायनों की मात्र हमारी बर्दाश्त क्षमता से काफी ऊपर जा चुकी है। पर्यावरण एवं वन मंत्री जयराम रमेश के मुताबिक रिपोर्ट से हमारे उद्योगों के बदसूरत चेहरे का पता चलता है।

उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकारों को चाहिए कि खतरनाक घोषित किए जा चुके शहरों में अब और उद्योग लगाने की इजाजत न दें और इन्हें साफ बनाने के लिए निवेश करें। केंद्र प्रदूषण दूर करने के प्रयास में उन्हें आर्थिक मदद करने को तैयार है।’ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह रिपोर्ट 2007 से 2009 के बीच के आंकड़ों पर आधारित है।

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