class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ठेठ गढ़वाली में गाए जा रहे कैरल

‘जै घौर मा ईसू चा वे घौर मा सुख ही सुख, यू बडु दिन अ नई खुशी लै (जिस घर में ईशू है, उस घर में सुख ही सुख है। यह बड़ा दिन नई खुशियां लेकर आया है।)’ गढ़वाली भाषा का यह कैरल पौड़ी के ईसाई समुदाय द्वारा क्रिसमस के अभिनंदन में गाया जा रहा है।

जिले के करीब तीन दजर्न गांवों और नगरों में ठेठ गढ़वाली अंदाज में क्रिसमस मनाया जाता है। ईसा मसीह की प्रार्थना गढ़वाली में की जाती है। बाइबिल के कुछ अध्यायों का भी गढ़वाली में अनुवाद किया गया है। पौड़ी में करीब 12 हजार इसाई समुदाय के लोग तीन दजर्न गांवों और नगरों में रहते हैं। यह सभी मैथोडिस्ट हैं।

पादरी वीबी सिंह बताते हैं कि, यहां के इसाई समुदाय के लोग गढ़वाली परम्परा से ही अपने सारे त्योहार मनाते हैं। क्रिसमस भी गढ़वाली अंदाज में ही मनाया जाता है। यहां ऐसे भी चर्च हैं, जहां प्रभु ईसा मसीह की प्रार्थना गढ़वाली बोली में पढ़ी जाती है। त्योहार के व्यंजनों में भी गढ़वाली भोजन को प्राथमिकता दी जाती है। पास्टर हरीश कुमार ने बताया कि, गढ़वाली क्रिश्चियन सभी हिन्दू त्योहारों को भी मनाते हैं।

पास्टर तारा चंद ने बताया कि उन्होंने बाइबिल के कुछ अध्यायों का गढ़वाली में अनुवाद कर इसे प्रकाशित करने के लिए बाइबिल सोसाइटी इलाहाबाद भेजा है। पास्टर राजेश कुमार डुंगरियाल ने बताया कि गुजरात के भाषा विद डा. इमेनुवल ने बाइबिल के न्यू टेसमेंट अध्याय के गढ़वाली अनुवाद में लेंग्वेज हेल्पर की रूप में काम किया है। ईसा मसीह के शिष्य लूका द्वारा लिखे गये अध्याय सु समाचार का भी गढ़वाली में अनुवाद किया गया है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ठेठ गढ़वाली में गाए जा रहे कैरल