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एमसीडी के पार्क होंगे हरे-भरे

अगर निगम के दावों को मानें तो अब एमसीडी के पार्कों में अब हरियाली नजर आएगी और उनका रखरखाव भी बेहतर हो सकेगा। निगम पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के आधार पर पार्कों के रखरखाव की योजना शुरू करने जा रहा है। यानी इन पार्कों का रखरखाव एनजीओ या आरडब्ल्यूए करेगी और पैसा निगम देगी।

मौजूदा समय में एमसीडी के पास करीब 600 मालियों की कमी है जिससे पार्कों का रखरखाव उसके लिए किसी समस्या से कम नहीं है। पार्कों की बदहाल स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। निगम का मानना है कि अगर पार्कों के रखरखाव में निजी भागीदारी बढ़ाई जाए तो इससे लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा और मालियों की पूर्ति हो सकेगी। निगम पीपीपी की इस योजना को 12 जनवरी को विवेकानंद के जन्मदिन से शुरु करने जा रहा है।

उद्यान समिति के अध्यक्ष धर्मवीर सिंह ने बताया कि योजना के तहत कोई भी रजिस्टर्ड आरडब्ल्यूए या क्षेत्रीय एनजीओ छोटी कालोनी के पार्कों के रखरखाव के लिए आवेदन कर सकता है। विभाग संबंधित आरडब्ल्यूए या एनजीओ को प्रति एकड़ छह हजार रुपया बागवानी मजदूर (माली) लगाने के लिए देगा। यह राशि तीन-तीन महीने के लिए एडवांस दी जाएगी। पार्कों के विकास के लिए बिजली, पानी आदि का खर्चा विभाग वहन करेगा।

यानी पार्कों के लिए पेड़ पौधे लगाने से लेकर बाकी सारी सुविधाएं एमसीडी संस्थाओं को देगी। संस्था को केवल माली लगाकर रखरखाव करना है। विभाग का काम बढ़ रहा है और स्टाफ कम होता जा रहा है। दूसरा मालियों की औसत उम्र भी ज्यादा होती जा रही है। ऐसे में कैसे हो पार्कों का रखरखाव, निगम के लिए समस्या बनी हुई थी लेकिन निगम की नई योजना से समस्या का समाधान होना आसान हो गया है।

 

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