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अभी तो हवा में हैं पानी के मीटर

सात महानगरों में पानी के मीटर लगाने पर असमंजस बना हुआ है। सच्चई यह है कि अभी तक किसी को पता ही नहीं कि मीटर कैसे लगेंगे। जिन अधिकारियों को नए मीटर लगाने की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें से अधिकतर ने ऐसे मीटर देखे तक नहीं है। पुराना पद्धति का मीटर लगेगा या बिजली मीटरों की तरह अत्याधुनिक चाइनीज मीटर, नहीं पता।

राज्य मंत्रिपरिषद ने जलकर वसूली के लिए मीटर सिस्टम लागू करने का फैसला किया। मंगलवार को नगर विकास विभाग ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया। इसमें यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि निकाय किस तरह मीटर देखकर टैक्स वसूलेगा। यानी पानी की ज्यादा खपत वालों से ज्यादा टैक्स।

छोटों को माफी। जिन शहरों में मीटर लगने हैं उनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, मथुरा, वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद शामिल हैं। स्थानीय निकाय निदेशालय में इस योजना से सम्बन्धित सलाहकार का कहना है कि मीटर लगाने और खरीदने की जिम्मेदारी जल निगम की है।

जेएनएनयूआरएम की इस योजना की नोडल एजेंसी वही है। जल निगम के प्रबन्ध निदेशक एके श्रीवास्तव का कहना है कि अभी तो शासनादेश हुआ है। अब वर्कआउट किया जाएगा। निकाय, नगर निगमों और जल संस्थानों की ओर से मीटर की जितनी माँग आएगी, उतने लगाए जाएँगे।

यह पूछे जाने पर कि कौन से मीटर लगेंगे, पुराने पैटर्न वाले या नई तकनीक वाले, श्री श्रीवास्तव कहते हैं कि अभी इस पर बात करना जल्दबाजी होगी। जब मीटर खरीदने की नौबत आएगी तो जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी आपस में बैठकर चर्चा कर लेंगे।

लखनऊ, कानपुर और आगरा के जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मीटर लगाने की इस व्यवस्था के बारे में सुना है लेकिन उनके पास कोई ऐसा आदेश नहीं आया कि वे इस बारे में सोचें।

वहीं शासन के अधिकारी कहते हैं कि केन्द्र सरकार के निर्देश हैं, इसलिए इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा और सबसे अच्छे मीटर लगाने की कोशिश की जाएगी ताकि जनता को मुश्किल न हो।

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