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उलझता तेलंगाना

आर्थिक विकास के आधार पर गढ़ा जाने वाला छोटे राज्यों का सिद्धांत सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर फिर उलझता जा रहा है। इसीलिए  तेलंगाना के मामले पर केंद्र सरकार की सांप-छछूंदर वाली स्थिति हो रही है। पहले संप्रग सरकार ने लोकतांत्रिक उदारता का परिचय देते हुए और रणनीतिक तौर पर तेलंगाना के नेता के. चंद्रशेखर राव की जान बचाने के लिए रात को जल्दबाजी में राज्य के गठन की स्वीकृति दे दी। जब चौतरफा विरोध बढ़ा तो गृहमंत्री सबसे मशविरा करने की बात करते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं, लेकिन मामला इतना गरमा चुका है कि वह ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

उस इलाके के लोग एक बार फिर अपने को छला महसूस करते हुए राजनीतिक इस्तीफे और हिंसक आंदोलनों पर उतर आए हैं, तो तटीय आंध्र और रायलसीमा के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार कुछ भी कर पाने में असहाय है। यह बात सही है कि दक्षिण में क्षेत्रीय भावना उत्तर भारत के मुकाबले ज्यादा प्रबल है और उनके आंदोलन के तरीकों में अनशन और धरने कम, आत्मदाह और आगजनी जैसे हथियार ज्यादा शामिल हो जाते रहे हैं। इसलिए हो सकता है कि बिना किसी आंदोलन के उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का आसानी से विभाजन हो जाए लेकिन लंबे आंदोलन के बावजूद आंध्र प्रदेश का विभाजन न हो पाए।

इसका मतलब यह नहीं है कि उत्तर की राजनीतिक चेतना ज्यादा लोकतांत्रिक और विकसित है, क्योंकि सामाजिक न्याय और विकास के मामले में दक्षिण के राज्यों में उत्तर से पहले और तीव्र प्रगति हुई है। इसका अर्थ यही है कि उत्तर और दक्षिण के विभिन्न क्षेत्रों के विकास और उसके प्रशासनिक ढांचे के लिए अलग नजरिए की  जरूरत है। दक्षिण के राज्यों में अस्मिता का सवाल जितनी तेजी से जोर पकड़ता है, उतनी तेजी से उत्तर भारत में नहीं उठता। इसके विपरीत उत्तर में जाति, धर्म और राष्ट्रवाद का सवाल ज्यादा तेजी से भड़कता है।

विविधता वाली इन स्थितियों के बीच केंद्र सरकार के सामने छोटे राज्यों के सवाल को अखिल भारतीय स्तर पर हल करने की चुनौती है, वहीं उसकी स्थानीय भावनाओं को उन्माद बनने से रोकना भी है। इस काम के लिए  कांग्रेस पार्टी को वैचारिक स्तर पर भी पहल करनी होगी और व्यावहारिक स्तर पर भी। एक तरफ क्षेत्रीय असमानताओं को मिटाने और उसके निदान के तौर पर राज्यों के स्वरूप पर सघन बहस की जरूरत है तो दूसरी तरफ क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे कर्मठ और ईमानदार नेतृत्व की जरूरत है जो उन्माद और बिखराव को रोक सकें।

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