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ग्लोबल वार्मिग के जमाने में नए राज्य

आज विश्व कोपेनहेगन में ग्लोबल वार्मिग से बचने के विभिन्न तरीकों की तलाश में माथापच्ची कर रहा है वहीं हम भारतीय आंध्र के विभाजन में अपनी दलीलें दे रहे हैं। हमें ईमानदारीपूर्वक मंथन करने की आवश्यकता है कि आखिर नए राज्य गठन की बात आती ही क्यों हैं, क्यों कोई राज्य अपने मातृ राज्य को छोड़ने के लिए आंदोलित होता है? नए राज्यों के गठन का दोषी केवल ओछी राजनीति व नेताओं की अतिमहत्वाकांक्षा को नहीं ठहराया जा सकता। इसकी सबसे बड़ी वजह विकास का दोमुंहापन है। एक ही प्रदेश का कोई भू-भाग अतिविकसित और कोई अविकसित क्यों रह जाता है? विकास का पहिया समानांतर रूप से चले तो कोई भी भू-भाग अपने राज्य से अलग न हो।
प्रणव कुमार सुजीत, रांची

छोटे राज्यों की बड़ी बहस
आजकल अखबार की सुर्खियों में हम पढ़ते हैं, बड़े-बड़े राज्यों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दो तो राज्यों का विकास बहुत तेजी से होगा। ये आग तो बहुत पहले से ही सुलग रही है। ये ख्याल बिल्कुल सही है कि हमारे देश की सारी जनता की खुशहाली इन्हीं छोटे-छोटे राज्यों के हित में है। यह कहना गलत नहीं होगा कि छोटा परिवार सुखी परिवार होता है।
अलफ्रेड रफाएल, पटना

बेवजह विवाद
अनेक विद्वान आज के संचार, परिवहन के दौर में भी यह मान लेते हैं कि छोटे राज्य जरूरी हैं एवं इसके लिए एक आयोग बनाया जाना चाहिए, परंतु शायद इस तरह के तर्क दिए जाने के समय विद्वान नेहरू की इस चेतावनी को भूल जाते हैं कि यह बर्र के छत्ते में हाथ डालने जैसा कार्य होगा। आयोग निर्माण से रिपोर्ट आने एवं लागू होने तक पूरा भारत फिर से अशांत हो जाएगा। यह तो भारत को गृहयुद्ध में धकेलने के समान हो सकता है। विकास छोटे राज्य या बड़े राज्यों से नहीं होगा। वास्तविक विकास एवं कल्याण अच्छी योजना एवं उसके क्रियान्वयन के ईमानदारीपूर्वक प्रयासों से होता है।
अवनीश कुमार सिन्हा, ए/64, मजिस्ट्रेट कॉलोनी, पटना

जितने राज्य, उतनी समस्याएं
नए राज्यों का म़ुद्दा जनता का मुद्दा नहीं है। मेरे मत में जितने ज्यादा राज्य होंगे उतनी ज्यादा समस्याएं होंगी। नेताओं को तो कुर्सी चाहिए। जनहित, विकास, अच्छा प्रशासन जैसी बातें केवल लफ्फाजी हैं।
डॉ. उमेश मित्तल, गंगोह रोड, सहारनपुर

अलग राज्य क्यों?
पूरे राज्य की कमाई
अपने इलाके में लगाई
और शान खूब चमकाई
कानून-व्यवस्था भी लड़खड़ाई
खजाना खाली कर ली अंगड़ाई
अब नए राज्य पर करो समाई
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

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