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मरीज ही नहीं, डॉक्टर भी भगवान भरोसे!

स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्र ने गुरुवार को स्वीकार किया कि अगले दो माह में यूपी में स्वाइन फ्लू के मरीजों की तादाद बेतहाशा बढ़ सकती है। यदि ऐसा हुआ तो गंभीर मरीजों को बचाना मुश्किल होगा। इसकी वजह है स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी।

उन्होंने माना कि वेंटीलेटर से जुड़ी समस्याओं के कारण गंभीर मरीजों को बचाना मुश्किल होगा और कानपुर में इसी वजह से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। मंत्री ने यह भी कहा कि विभागीय डॉक्टर बेहद मेहनती हैं लेकिन संसाधनों की कमी से वह भी कई बार भगवान भरोसे ही मरीज की जान बचा पाते हैं।

स्वाइन फ्लू को लेकर कनवेंशन सेण्टर में सभी जिलों के सीएमओ व सीएमएस के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला में मंत्री की लाचारी साफ झलकी। स्वास्थ्य मंत्री मुख्यरूप से वेंटीलेटर और इसे चलाने वालों की कमी से आहत नजर आए।

उन्होंने माना कि विभाग के किसी भी अस्पताल में अब तक एक भी वेंटीलेटर नहीं चल रहा है। स्वाइन फ्लू के मरीज यदि गंभीर अवस्था में होते हैं तो केवल वेंटीलेटर पर रखकर ही उन्हें बचाया जा सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि अभी पीजीआई, चिकित्सा विश्वविद्यालय, बीएचयू व मेडिकल कालेजों में वेंटीलेटर की सुविधा है।

लेकिन एक सवाल यह भी है कि यदि स्वाइन फ्लू के मरीजों को आईसीयू में आम मरीजों के साथ ही रख दिया जाएगा तो उनमें भी बीमारी फैलने की आशंका हो जाएगी। मंत्री ने कहा कि इस समस्या से निपटना एक चुनौती है।

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी है कि अगले दो माह में यूपी में मौसम व अन्य कारणों से स्वाइन फ्लू के मरीज काफी बढ़ सकते हैं। मंत्री ने कहा कि इसे देखते हुए सबसे पहली कोशिश यह होनी चाहिए कि मरीज की पहचान एडवांस में कर ली जाए।

मरीज को दवा मिलेगी और वह गंभीर हालत के हवाले होने से बच सकेगा। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. पी रवींद्रन ने कहा कि स्वाइन फ्लू पर नकेल लगाना हमारे लिए चुनौती होगी। हमें पहले से तैयार होंगे ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों को वेंटीलेटर पर भी रखे जाने के लिए डॉक्टर व कर्मचारियों का अलग से प्रशिक्षण होना चाहिए। कार्यशाला में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ला, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरआर भाराती, परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. सीबी प्रसाद चिविवि के डीन डॉ. जेवी सिंह, पीजीआई के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. टीएन ढोल समेत अन्य विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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